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बरेली में लगेगी मिनी ऑयल फैक्ट्री, 10 मार्च तक करना होगा आवेदन, सब्सिडी देगी योगी सरकार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उद्योगोन्मुखी विजन को जमीनी स्तर पर मजबूती देने की दिशा में बरेली में बड़ा कदम उठाया गया है। नेशनल मिशन ऑन एडिबिल ऑयल (ऑयलसीड्स) योजना के तहत जिले में ऑयल एक्सट्रैक्शन यूनिट और मिनी यूनिट की ऑनलाइन बुकिंग शुरू कर दी गई है।

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बरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उद्योगोन्मुखी विजन को जमीनी स्तर पर मजबूती देने की दिशा में बरेली में बड़ा कदम उठाया गया है। नेशनल मिशन ऑन एडिबिल ऑयल (ऑयलसीड्स) योजना के तहत जिले में ऑयल एक्सट्रैक्शन यूनिट और मिनी यूनिट की ऑनलाइन बुकिंग शुरू कर दी गई है। इसका उद्देश्य किसानों को केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें प्रसंस्करण और उद्यमिता से जोड़ना है, ताकि गांवों में ही रोजगार के अवसर बढ़ सकें। उप कृषि निदेशक हिमांशु पांडेय ने बताया कि वर्ष 2025-26 के लिए तय लक्ष्य के मुकाबले आवेदन कम प्राप्त हुए थे। इस पर कृषि निदेशालय के निर्देश पर विभागीय पोर्टल [https://agridarshan.up.gov.in] https://agridarshan.up.gov.in) को दोबारा खोल दिया गया है, ताकि पात्र आवेदक दोबारा आवेदन कर सकें। जिले में 10 टन क्षमता की एक ऑयल एक्सट्रैक्शन यूनिट, दो मिनी यूनिट और 69 तिरपाल का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभाग को उम्मीद है कि अब अधिक संख्या में किसान और युवा आगे आएंगे।

ई-लॉटरी से होगा चयन, 5 हजार टोकन मनी

10 टन क्षमता की ऑयल एक्सट्रैक्शन यूनिट के लिए 5,000 रुपये की टोकन मनी निर्धारित की गई है। लाभार्थियों का चयन पूरी तरह पारदर्शी ई-लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। मिनी ऑयल एक्सट्रैक्शन यूनिट की बुकिंग भी ऑनलाइन होगी। वहीं तिरपाल के लिए निःशुल्क टोकन मनी रखी गई है और इसका आवंटन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा। ऑयल एक्सट्रैक्शन यूनिट और मिनी यूनिट के लिए आवेदन 10 मार्च तक किए जा सकेंगे। तिरपाल की बुकिंग 15 मार्च की रात 12 बजे तक मान्य रहेगी।

खेती से फैक्ट्री तक मॉडल को मिल रही रफ्तार

योगी सरकार का फोकस अब खेती से फैक्ट्री तक मॉडल को मजबूत करने पर है। तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय स्तर पर तेल निष्कर्षण इकाइयों की स्थापना से किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और परिवहन लागत भी कम होगी। यह पहल ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करने के साथ-साथ गांवों में छोटे कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देगी। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और प्रदेश आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम बढ़ाएगा।

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