
बरेली। भमोरा थाना क्षेत्र में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म और जबरन मतांतरण के सनसनीखेज मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। 12वीं में छात्रा को पढ़ाने वाले शिक्षक फईम खान को अपर सत्र न्यायाधीश देवाशीष की अदालत ने 20 वर्ष के कठोर कारावास और 35 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। फैसले ने भरोसे की आड़ में हुए अपराध पर कानून की कड़ी कार्रवाई को उजागर कर दिया।
पांच फरवरी 2017 की सुबह करीब सात बजे 17 वर्षीय छात्रा कोचिंग पढ़ने के लिए घर से निकली थी। आरोप है कि रास्ते में ही उसके शिक्षक फईम खान ने अपने साथियों के साथ मिलकर उसका अपहरण कर लिया। घटना के बाद परिवार में हड़कंप मच गया और पिता ने भमोरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
अभियोजन के अनुसार, आरोपी छात्रा को पहले दिल्ली ले गया और फिर इलाहाबाद में एक कमरे में बंधक बनाकर रखा। इस दौरान छात्रा पूरी तरह आरोपी के कब्जे में रही और बाहर संपर्क नहीं कर सकी। यह पूरा घटनाक्रम आरोपी की सुनियोजित साजिश को दर्शाता है।
पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि आरोपी ने उसका मतांतरण कराकर उसका नाम बदलकर नूर फातिमा रख दिया। यह खुलासा सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए छात्रा को बरामद किया और उसके बयान दर्ज किए। पीड़िता ने स्पष्ट कहा कि उसे जबरन अपने साथ ले जाया गया और उसकी इच्छा के विरुद्ध बंधक बनाकर रखा गया।
सुनवाई के दौरान अदालत में सात गवाह पेश किए गए। पीड़िता के पिता ने अदालत में बताया कि आरोपी उनकी बेटी का शिक्षक था, जिसने भरोसे का सबसे बड़ा विश्वासघात किया। अभियोजन ने साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले को मजबूती से प्रस्तुत किया।
सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने फईम खान को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत का यह फैसला साफ संदेश देता है कि नाबालिगों के खिलाफ अपहरण और जबरन मतांतरण जैसे अपराधों पर कानून बेहद सख्त है और दोषियों
Published on:
27 Mar 2026 11:11 am
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