
मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल
बरेली। बरेली-सितारगंज फोरलेन घोटाले के पैकेज-1 (बरेली) में गड़बड़ी करने वाले पांच अधिकारियों पर डीएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। अब कमिश्नर की जांच में दोषी पाए गए 23 अधिकारियों और कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है। बुधवार को इन सभी की निगाहें लखनऊ पर टिकी रहीं, हालांकि देर शाम तक बरेली प्रशासन को कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ। कमिश्नर द्वारा बरेली-सितारगंज फोरलेन के पैकेज-2 (पीलीभीत) की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई गई थी, जिसमें करीब 59 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ था।
कमिश्नर की जांच में 23 अधिकारी और कर्मचारी दोषी पाए गए:
एनएचएआई के तत्कालीन परियोजना निदेशक एआर चित्रांशी और बीपी पाठक
एनएचएआई के साइट इंजीनियर पीयूष जैन और पारस त्यागी
कंसल्टेंसी एजेंसी साई सिस्ट्रा ग्रुप के प्रतिनिधि उजैर अख्तर
एसए इंफ्रा स्ट्रक्चर कंसल्टेंसी के प्रतिनिधि राजीव कुमार और सुनील कुमार
शिवम सर्वेइंग सिस्टम के वैल्यूअर रविंद्र गंगवार और सुरेश गंगवार
क्षेत्रीय लेखपाल मुकेश मिश्रा, विनय कुमार, दिनेश चंद्र, आलोक कुमार, मुकेश गंगवार, तेजपाल, ज्ञानदीप
एसएलएओ ऑफिस के तत्कालीन भूमि अर्जन अमीन अनुज वर्मा और तत्कालीन एसएलएओ सुल्तान अशरफ सिद्दीकी
मौजूदा एसएलएओ अशीष कुमार, मदन कुमार, राजीव पांडेय पर कार्रवाई हो चुकी है।
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन उदय नारायण और एई सुरेंद्र सिंह
घोटाले के आरोपियों पर मुख्यमंत्री कार्यालय सख्त
इन अधिकारियों पर परिसंपत्तियों के मूल्यांकन और भूमि उपयोग परिवर्तन में बड़े घोटाले का आरोप है। समिति की रिपोर्ट को कमिश्नर ने पिछले सप्ताह शासन को सौंप दिया था। डीएम की रिपोर्ट पर कार्रवाई होने के बाद, कमिश्नर की जांच में दोषी पाए गए अधिकारियों की धड़कनें तेज हो गई हैं।सूत्रों के अनुसार, लखनऊ में कार्रवाई की तैयारी हो चुकी है, और बुधवार को अवकाश के बावजूद कई अधिकारी और कर्मचारी आपस में संपर्क कर लखनऊ से आ रहे आदेशों का पता लगाने की कोशिश करते रहे।
Published on:
03 Oct 2024 11:31 am
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