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बरेली भू-अधिग्रहण घोटाला: दो एसएलएओ समेत पांच कर्मी निलंबित, मुख्यमंत्री ने दिया ये आदेश

बरेली-पीलीभीत-सितारगंज हाईवे और बरेली रिंग रोड के लिए किए गए भू-अधिग्रहण में सामने आए घोटाले के बाद सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में दो तत्कालीन सक्षम प्राधिकारी, भूमि अध्याप्ति (एसएलएओ) समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

बरेली। बरेली-पीलीभीत-सितारगंज हाईवे और बरेली रिंग रोड के लिए किए गए भू-अधिग्रहण में सामने आए घोटाले के बाद सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में दो तत्कालीन सक्षम प्राधिकारी, भूमि अध्याप्ति (एसएलएओ) समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही सीएम ने दोषी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो और अन्य कर्मियों की पहचान कर उन्हें भी निलंबित करने के निर्देश दिए हैं।

200 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितता

अब तक इस भू-अधिग्रहण घोटाले में 200 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर मुख्यमंत्री ने सक्षम प्राधिकारी मदन कुमार और आशीष कुमार को निलंबित करने का आदेश जारी किया है। साथ ही तहसीलदार सदर के लेखपाल उमाशंकर, नवाबगंज के लेखपाल सुरेश सक्सेना, और एसएलएओ के अमीन डबर सिंह को भी निलंबन की प्रक्रिया शुरू की गई है। दोनों एसएलएओ के निलंबन की प्रक्रिया शासन के नियुक्ति विभाग द्वारा पूरी की जाएगी।

अन्य अफसरों और कर्मचारियों पर भी गिरेगी गाज

घोटाले से संबंधित एक पूरक रिपोर्ट में कई और अधिकारियों व कर्मचारियों की गड़बड़ियों की जानकारी मिली है। इनमें विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय के तत्कालीन अमीन अनुज वर्मा, लेखपाल आशीष कुमार, मुकेश कुमार, विनय, दिनेश चंद्र, ग्राम विलहरा माफी और मुडलिया गोसू के क्षेत्रीय लेखपाल मुकेश गंगवार, हेमंतडांडी के क्षेत्रीय लेखपाल तेजपाल, ग्राम भैंसहा के क्षेत्रीय लेखपाल ज्ञानदीप गंगवार, उगनपुर के क्षेत्रीय लेखपाल मुकेश कुमार मिश्रा, अमरिया के क्षेत्रीय लेखपाल विनय कुमार और दिनेश चंद्र, तथा ग्राम हुसैन नगर और सरदार नगर के क्षेत्रीय लेखपाल आलोक कुमार शामिल हैं। इन्हें भी घोटाले में लिप्त पाते हुए जल्द निलंबित करने की सिफारिश की गई है। इससे पहले एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी के सात अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है, जबकि घोटाले की जांच में हर कदम पर लापरवाही पाई गई है।


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