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बरेली के सर्राफ ने सजाया रामलला का मुकुट, जड़े हीरा और पन्ना, 70 कारीगरों ने 14 दिन में किया तैयार, जानें खूबी

बरेली। अयोध्या में विराजे रामलला के शृंगार के लिए बरेली में आभूषण तैयार किए गए। आभूषणों को बनाने की जिम्मेदारी बरेली के हरसहायमल श्यामलाल ज्वेलर्स को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सौंपी थी। 70 कारीगरों की टीम ने 14 दिनों तक 24 घंटे काम किया। सीसीटीवी कैमरे से परिसर लैस रहा। ट्रस्ट को आभूषण सौंपे जाने के बाद सोना, हीरा, माणिक्य और पन्ना की जांच इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (आईजीआई) से भी कराई गई। फिर इन्हें रामलला को धारण कराया गया।

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मुकुट और हार पर सूर्य की छवि

निदेशक मोहित आनंद के मुताबिक दो जनवरी को लखनऊ शोरूम की जिम्मेदारी संभाल रहे भाई अंकुर आनंद के पास ट्रस्ट से कॉल आया। 16 जनवरी तक आभूषण बनाकर देने की शर्त रखी। महज 14 दिन में आभूषण बनाना आसान नहीं था। 70 कुशल कारीगरों की टीम तैनात करके शिफ्टवार 24 घंटे कार्य किया और 16 जनवरी को आभूषण ट्रस्ट को सौंप दिए। भगवान के मुकुट और हार पर सूर्य की छवि सूर्यवंश के प्रतीक के रूप में प्रदर्शित है।

सोने की छेनी और चांदी की हथौड़ी का किया प्रयोग

मोहित के मुताबिक प्रभु के आभूषणों में क्या प्रतीक होंगे, कौन से रत्न जड़े जाएंगे, कितनी लंबाई, चौड़ाई व वजन होगा? ये सब ट्रस्ट के मार्गदर्शन में हुआ। आभूषण बनाने के दौरान कड़ी निगरानी रही। सीसीटीवी कैमरे से परिसर लैस रहा। रामलला के नेत्र गढ़ने के लिए सोने की छेनी और चांदी की हथौड़ी का प्रयोग हुआ। मोहित के अनुसार प्रमुख आभूषणों में रामलला को पहनाई गई विजयमाला का वजन दो किलो है।

वजन और गुणवत्ता हालमार्क से है प्रमाणित

इसके अलावा 17 सौ ग्राम का मुकुट, 16 ग्राम का तिलक, 65 ग्राम की मुद्रिका, 500 ग्राम का कंठ हार, 660 ग्राम का पंचलड़ा, 750 ग्राम की करधनी, 850 ग्राम के हाथ के कड़े और 560 ग्राम के पैर के कड़े प्रमुख हैं। मोहित ने बताया कि सभी आभूषण हस्तनिर्मित हैं। इनका वजन और गुणवत्ता हालमार्क से प्रमाणित है। ट्रस्ट को आभूषण सौंपे जाने के बाद सोना, हीरा, माणिक्य और पन्ना की जांच इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (आईजीआई) से भी कराई गई। फिर इन्हें रामलला को धारण कराया गया।

आभूषणों की खूबियां

मुकुट : उत्तर भारतीय परंपरा में स्वर्ण निर्मित मुकुट माणिक्य, पन्ना, हीरों से अलंकृत है। मुकुट के मध्य सूर्य चिह्न बना है, जो सूर्यवंश का प्रतीक है। दायीं ओर मोतियों की लड़ियां पिरोई गई हैं।

कुंडल : भगवान के कुंडल पर मयूर आकृतियां बनी हैं। ये सोने, हीरे, माणिक्य और पन्ने से सुशोभित हैं।

कंठा : अर्द्धचंद्राकार रत्नों से जड़ित कंठा है। इसमें फूल और सूर्य देव बने हैं। ये सोने, हीरे, माणिक्य जड़ा है। पन्ने की लड़ी लगी है।

ह्दय : ह्दय पर कौस्तुभमणि है, जो बड़े माणिक्य और हीरों से अलंकृत है।

पदिक : कंठ से नीचे, नाभिकमल से ऊपर तक का हार है। ये हीरे और पन्ने का पंचलड़ा है। नीचे एक बड़ा पेंडेंट लगा है। पैरों में सोने के कड़े और पैजनियां पहनाए गए हैं।

बायां हाथ : प्रभु राम के बाएं हाथ में 5.5 फुट का सोने का धनुष है। मोती, माणिक्य, पन्ने की लटकनें हैं। दाएं हाथ में दो फुट का सोने का बाण (तीर) है।

वनमाला : गले में फूलों की आकृति की वनमाला है। मस्तक पर पारंपरिक मंगल-तिलक को हीरे और माणिक्य से बनाया गया है।

चरण : प्रभु के चरणों में कमल है। नीचे एक स्वर्णमाला सजाई गई है। सामने की ओर खेलने के लिए चांदी के खिलौने बनाए गए हैं। इसमें झुनझुना, हाथी, घोड़ा, ऊंट, खिलौना गाड़ी है।

प्रभा मंडल : प्रभु राम के प्रभा-मंडल पर सोने का छत्र लगा है।

विजयहार : विजय की प्रतीक माला पांच फुट लंबी है और सोने से बनी है। इसमें कई माणिक्य लगे हैं। वैष्णव परंपरा के तहत मंगल चिह्न, सुदर्शन चक्र, पद्मपुष्प, शंख, मंगल-कलश दर्शाया गया है। इस पर पांच प्रकार के पुष्प कमल, चम्पा, पारिजात, कुंद और तुलसी को उकेरा गया है।

करधनी : इसमें सोने से प्राकृतिक छटा उकेरी गई है। ये हीरे, माणिक्य, मोती, पन्ने से अलंकृत है। छोटी-छोटी पांच घंटियां लगी हैं। साथ ही, मोती, माणिक्य, पन्ने की लड़ियां लटक रही हैं। बाजूबंध, कंगन, मुद्रिका: दोनों भुजाओं में स्वर्ण और रत्नों से जड़ित बाजूबंध पहनाए गए हैं। हाथों में रत्न जड़ित कंगन और मुद्रिकाएं हैं। इनमें मोती लटक रहे हैं।


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