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‌मुंबई में भटक रहा था बरेली का रमेश, हरिद्वार और बिजनौर तक ढूंढा, फिर 27 साल बाद ऐसे मिली परिवार की खबर

मानसिक रूप से अस्वस्थ और 27 साल से परिवार से बिछड़े रमेश को आखिरकार बरेली की मनोसमर्पण सेवा संस्था ने उनके परिजनों से मिलवा दिया। संस्था के संस्थापक और साइकोलॉजिस्ट डॉ. शैलेश शर्मा और उनकी टीम की लगातार काउंसलिंग व प्रयासों से यह कारनामा संभव हुआ।

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रमेश का पहले का फोटो और अब का फोटो। (फोटो सोर्स: पत्रिका)

बरेली। मानसिक रूप से अस्वस्थ और 27 साल से परिवार से बिछड़े रमेश को आखिरकार बरेली की मनोसमर्पण सेवा संस्था ने उनके परिजनों से मिलवा दिया। संस्था के संस्थापक और साइकोलॉजिस्ट डॉ. शैलेश शर्मा और उनकी टीम की लगातार काउंसलिंग व प्रयासों से यह कारनामा संभव हुआ।

70 वर्षीय रमेश, जो वर्षों से मानसिक बीमारी से जूझ रहे थे, वर्ष 2025 की फरवरी में मुंबई की एकतानगर रेलवे कॉलोनी में भटकते हुए पुलिस को मिले थे। पुलिस ने उन्हें भायखला थाने में रेस्क्यू कर पहले ग्रेस फाउंडेशन और फिर श्रद्धा रिहैबिलिटेशन सेंटर कर्जत भेजा, जहां डॉ. भरत वाटवानी की देखरेख में उनका उपचार शुरू हुआ।

इलाज के दौरान रमेश ने बताया कि वह मूल रूप से बरेली के निवासी हैं और उनका नाम रमेश है। इसके बाद श्रद्धा संस्था ने उन्हें बरेली स्थित मनोसमर्पण सेवा संस्थान में शिफ्ट किया, ताकि उन्हें उनके घर पहुंचाया जा सके। संस्था के निदेशक डॉ. शैलेश शर्मा ने बताया कि रमेश को पहचान दिलाने के लिए लगातार काउंसलिंग की गई। पहले रमेश ने अपने पिता सुदामा, बहन कांता और बहनोई भुगन का नाम लिया और हासमपुर गांव का पता बताया, लेकिन वहां कोई सुराग नहीं मिला।

बाद में रमेश ने हरिद्वार के रायसी और बिजनौर के नहटौर गांव का जिक्र किया। जांच के दौरान नहटौर में पूरन और सुभाष नामक व्यक्तियों की जानकारी मिली, जो परचून की दुकान चलाते हैं। मुकुल कुमार की अगुवाई में मनोसमर्पण की टीम नहटौर पहुंची, जहां सुभाष मिले। उन्होंने पुष्टि की कि वह रमेश के बहनोई हैं। इसके बाद रमेश की बहन शीला देवी से वीडियो कॉल कर संपर्क कराया गया। भाई को देखकर वह फूट-फूट कर रो पड़ीं। शीला देवी ने बताया कि रमेश 27 साल पहले बरेली से उनके घर नहटौर आने के लिए निकले थे और उसके बाद से लापता हो गए थे।

शीला देवी ने अपने दूसरे भाई सुभाष का पता संस्था को दिया, जो बरेली के हजियापुर मोहल्ले में रहते हैं। सुभाष जब यह खबर सुनकर पहुंचे तो अपने भाई को देख कर भावुक हो उठे। उन्होंने कहा, “27 साल बाद भाई को पाकर आंखों पर यकीन नहीं हो रहा। मां हमेशा कहती थीं कि रमेश लौटेगा, लेकिन वह इंतज़ार करते-करते इस दुनिया से चली गईं। मनोसमर्पण संस्था के समाजसेवी मुकुल कुमार और रंजीत मौर्य ने पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रमेश को उनके परिजनों को सौंप दिया।

संस्था से जुड़े वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सर्वेश चंद्रा ने बताया कि मनोसमर्पण सेवा संस्थान मानसिक रोगियों, निराश्रितों और बेसहारा लोगों की निःशुल्क देखभाल करता है। यदि किसी को कोई विक्षिप्त या बेसहारा व्यक्ति सड़कों पर दिखे, तो संस्था के हेल्पलाइन नंबर +91-9720333655 / +91-9720333755 पर संपर्क करें। संस्था आम नागरिकों से अपील करती है कि इस सेवा से जुड़ें और मानवता की सेवा में हाथ बढ़ाएं।


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