
रामायण फाइनेंस के मालिक किशोर कटरू और अभिनव कटरू
बरेली। दो ऑटो की फाइनेंस को लेकर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने रामायण ऑटो फाइनेंस लिमिटेड के पक्ष में आदेश दिया। आयोग ने कहा कि जिस व्यक्ति ने खुद लोन नहीं लिया और वाहन किराये पर चल रहे थे, वह उपभोक्ता कानून के तहत राहत नहीं मांग सकता। इसी के साथ चार लाख रुपये मुआवजा और 70 हजार रुपये क्षतिपूर्ति की मांग वाला परिवाद खारिज कर दिया गया।
भिंडौलिया निवासी निसार ने आयोग में शिकायत दाखिल कर आरोप लगाया था कि रामायण ऑटो फाइनेंस ने गलत तरीके से उनके दो ऑटो नीलाम कर दिए। उनका कहना था कि किस्तों को लेकर उन्हें परेशान किया गया और मानसिक व आर्थिक नुकसान पहुंचा। शिकायत में चार लाख रुपये मुआवजा और 70 हजार रुपये हर्जाने की मांग की गई थी।
मामले की सुनवाई शुरू हुई तो रिकॉर्ड ने पूरा मामला बदल दिया। आयोग के सामने दस्तावेज रखे गए, जिनसे पता चला कि दोनों ऑटो का लोन निसार ने नहीं बल्कि उनके बेटे मो. साजिद ने लिया था। यहीं से केस कमजोर पड़ गया। आयोग ने माना कि जब लोन लेने वाला दूसरा व्यक्ति है तो शिकायत करने वाला सीधे तौर पर उपभोक्ता नहीं माना जा सकता। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि दोनों ऑटो निजी इस्तेमाल में नहीं थे। उन्हें किराये पर चलाया जा रहा था और उनसे कमाई हो रही थी। आयोग ने माना कि यह व्यवसायिक इस्तेमाल है। ऐसे मामलों में उपभोक्ता संरक्षण कानून का फायदा नहीं लिया जा सकता। यही बिंदु रामायण फाइनेंस के पक्ष में सबसे मजबूत साबित हुआ।
ऑटो की कई किस्तें समय पर जमा नहीं हुई थीं। कई चेक बाउंस होने के बाद कंपनी ने नोटिस जारी किए। बाद में नियमों के तहत वाहनों की नीलामी की कार्रवाई की गई। आयोग ने माना कि फाइनेंस कंपनी ने तय प्रक्रिया के अनुसार कदम उठाए थे, इसलिए सेवा में कमी का आरोप साबित नहीं होता। कानूनी जानकार इस फैसले को वाहन फाइनेंसिंग मामलों में बड़ी नजीर मान रहे हैं। खासतौर पर उन मामलों में, जहां वाहन व्यवसायिक इस्तेमाल में हों और शिकायतकर्ता खुद लोन लेने वाला न हो। आयोग के अध्यक्ष दीपक कुमार त्रिपाठी और सदस्य दिनेश कुमार गुप्ता ने 18 मई 2026 को यह फैसला सुनाया।
Updated on:
21 May 2026 12:40 pm
Published on:
20 May 2026 10:26 pm
बड़ी खबरें
View Allबरेली
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
