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यूपी के इस जिले में गौशाला में गायों की मौत : CVO के ट्रांसफर और VO के निलंबन की संस्तुति, लापरवाही की फाइल शासन तक

अनिरुद्धपुर गोशाला में गोवंश की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जांच के बाद मुख्य विकास अधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) डॉ. मनमोहन पांडेय के स्थानांतरण और पशु चिकित्सा अधिकारी (VO) डॉ. संजय वर्मा के निलंबन की संस्तुति जिलाधिकारी को भेज दी है।
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बरेली

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Avanish Pandey

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Updated: 17 Jan 2026, 11:56 AM IST

बरेली। अनिरुद्धपुर गोशाला में गोवंश की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जांच के बाद मुख्य विकास अधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) डॉ. मनमोहन पांडेय के स्थानांतरण और पशु चिकित्सा अधिकारी (VO) डॉ. संजय वर्मा के निलंबन की संस्तुति जिलाधिकारी को भेज दी है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कामकाज में उदासीनता और प्रभावी निगरानी के अभाव के चलते गोशालाओं की व्यवस्था चरमरा गई, जिसका नतीजा गोवंश की मौत के रूप में सामने आया।

सीडीओ ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा कि CVO स्तर से न तो टीम की नियमित मॉनिटरिंग हो रही थी और न ही गोशालाओं के संचालन को लेकर अपेक्षित सख्ती दिखी। इसी लापरवाही के आधार पर स्थानांतरण की संस्तुति की गई है, जबकि फील्ड स्तर पर जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे VO के निलंबन की मांग रखी गई है।

पशु चिकित्सक को नोटिस, वेतन रोका

मामले में CVO ने सिरौली के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार वर्मा को नोटिस जारी कर चार बिंदुओं पर जवाब तलब किया है—गोशाला परिसर व नादों में अत्यधिक गंदगी क्यों मिली, मृत गोवंशों के शवों के निस्तारण में देरी क्यों हुई, भरण-पोषण में लापरवाही कैसे हुई और बीमार पशुओं को सिक वार्ड में रखने के बजाय कड़ाके की ठंड में खुले में क्यों छोड़ा गया। नोटिस के साथ जनवरी का वेतन भी रोक दिया गया है। आरोप है कि खुले में छोड़े गए पशुओं को पक्षी नोचकर जख्मी कर रहे थे।

शासन तक गूंजी गोशाला की बदहाली

अनिरुद्धपुर गोशाला में भूख और बीमारी से पांच गोवंशों की मौत की सूचना शासन तक पहुंचते ही अफसर हरकत में आए। पशुपालन विभाग के निदेशक को भेजी गई रिपोर्ट में गोशाला परिसर और नादों में गंदगी की पुष्टि करते हुए केयर-टेकरों की घोर लापरवाही का उल्लेख है। शव निस्तारण में चूक के लिए प्रधान व सचिव की जिम्मेदारी भी तय की गई है। बताया जा रहा है कि गोशाला की बदहाली का वीडियो पहले ही वायरल हो चुका था, लेकिन समय रहते संज्ञान नहीं लिया गया।

निरीक्षण कागजों में, ज़मीनी सुधार जीरो

CVO डॉ. मनमोहन पांडेय 14 जनवरी को निरीक्षण पर पहुंचे थे। दस्तावेजों से खुलासा हुआ कि 20 नवंबर 2025 को मझगवां बीडीओ ने निरीक्षण कर अव्यवस्थाएं दर्ज की थीं। इसके बाद 24 व 30 दिसंबर 2025 और 6 जनवरी को पशु चिकित्सा अधिकारी ने भी पंजिका में लिखा कि मानक के अनुरूप चारा नहीं दिया जा रहा और गोशाला में गंदगी है।फिर भी हालात नहीं सुधरे। सवाल यह है कि बार-बार दर्ज आपत्तियों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

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