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डी-फार्मा के नाम पर छात्रों से करोड़ों का खेल, फर्जी मार्कशीट थमाकर फरार हुए कॉलेज चेयरमैन और प्रबंधक, कोर्ट के आदेश पर FIR

डी-फार्मा कराने के नाम पर बच्चों से लाखों रुपये ऐंठने और बाद में फर्जी मार्कशीट थमाकर उनका भविष्य बर्बाद करने का मामला सामने आया है। पीड़ित छात्रों ने जब हर जगह गुहार लगाई और कहीं सुनवाई नहीं हुई, तो आखिरकार कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब अदालत के सख्त रुख के बाद थाना बिथरी चैनपुर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।

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बरेली। डी-फार्मा कराने के नाम पर बच्चों से लाखों रुपये ऐंठने और बाद में फर्जी मार्कशीट थमाकर उनका भविष्य बर्बाद करने का मामला सामने आया है। पीड़ित छात्रों ने जब हर जगह गुहार लगाई और कहीं सुनवाई नहीं हुई, तो आखिरकार कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब अदालत के सख्त रुख के बाद थाना बिथरी चैनपुर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।

मामले में थाना क्षेत्र के ग्राम पदारथपुर निवासी माजिद अली खां समेत बरेली और आसपास के जिलों के करीब एक दर्जन छात्र शामिल हैं। पीड़ितों का आरोप है कि मुजफ्फरनगर स्थित बाबा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी के कर्ताधर्ताओं ने साल 2021–22 में उन्हें डी-फार्मा की पढ़ाई आसानी से पास कराने का झांसा दिया। हर छात्र से करीब 1.90 लाख रुपये वसूले गए। पीड़ित ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन ने बिना पढ़ाई और परीक्षा के ही नकली डिग्री पकड़ा दी।

गांव-गांव घूमकर आरोपियों ने वसूले रूपये

पीड़ित का कहना है कि कॉलेज प्रबंधक इमलाख खान, चेयरमैन इमरान खान और उनके भाई आरिफ खान गांव-गांव घूमकर खुद छात्रों से कैश और बैंक खातों में रुपये जमा कराते रहे। अलग-अलग तारीखों में बैंक के खातों में करीब 5.97 लाख रुपये डलवाए गए। जब कुछ छात्रों ने परीक्षा देने की बात कही तो उन्हें टरका दिया गया, और बाद में अतिरिक्त पैसे की डिमांड शुरू हो गई। आरोप है कि पैसे लेने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने छात्रों को फर्जी डी-फार्मा मार्कशीट थमा दी। जब छात्र यूपी फार्मेसी काउंसिल, लखनऊ पहुंचे तो वहां सच्चाई सामने आ गई। काउंसिल ने रजिस्ट्रेशन खारिज कर दिया और बताया कि मार्कशीट पूरी तरह फर्जी हैं, यहां तक कि पासिंग ईयर तक में हेराफेरी की गई है।

कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने दर्ज की रिपोर्ट

यहीं नहीं, पीड़ितों का कहना है कि कॉलेज वालों ने कुछ छात्रों की हाईस्कूल और इंटर की ओरिजिनल मार्कशीट तक दबाकर रख लीं। जब छात्रों ने विरोध किया तो उन्हें खुलेआम धमकाया गया। कहा गया कि हमारी राजनीतिक पकड़ है, कहीं शिकायत की तो तुम्हारा जीना मुश्किल कर देंगे। पीड़ितों ने थाने से लेकर अन्य अफसरों तक कई बार शिकायत की, लेकिन हर जगह मामला दबा दिया गया। आखिरकार मजबूर होकर छात्रों ने कोर्ट का रुख किया। अदालत ने पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए बिथरी चैनपुर पुलिस को केस दर्ज करने का आदेश दिया।


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