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एसआईआर को लेकर सपा में रार, गुटबाजी की रिपोर्ट अखिलेश तक, बरेली से वीरपाल यादव आउट, शशांक को मिली कमान

समाजवादी पार्टी में संगठनात्मक खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उपजी अंदरूनी रार की आंच सीधे पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव तक पहुंची, जिसके बाद नेतृत्व ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बरेली जिले के एसआईआर प्रभारी और राष्ट्रीय सचिव व पूर्व सांसद वीरपाल सिंह यादव को यहां से हटा दिया।

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बरेली। समाजवादी पार्टी में संगठनात्मक खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उपजी अंदरूनी रार की आंच सीधे पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव तक पहुंची, जिसके बाद नेतृत्व ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बरेली जिले के एसआईआर प्रभारी और राष्ट्रीय सचिव व पूर्व सांसद वीरपाल सिंह यादव को यहां से हटा दिया। उन्हें लखीमपुर जिले का प्रभारी बनाया गया है, जबकि बरेली की जिम्मेदारी पूर्व एमएलसी शशांक यादव को सौंपी गई है।

एसआईआर के तहत बूथ लेवल ऑफिसर की तर्ज पर बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) तैनात कर मतदाता सूची में नाम जोड़ने, घर-घर सत्यापन और आपत्तियों के निस्तारण का जिम्मा पार्टी ने अपने नेताओं को सौंपा था। इसी क्रम में बरेली और पीलीभीत के लिए वीरपाल सिंह यादव को प्रभारी बनाकर सभी विधानसभा क्षेत्रों में बीएलए प्रशिक्षण शिविर आयोजित कराने के निर्देश दिए गए थे।

जिलाध्यक्ष को शिविरों में आमंत्रित न करने पर सामने आई गुटबाज़ी

लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर उलट निकली। जिले की नौ विधानसभा सीटों में शहर और कैंट क्षेत्रों में महानगर इकाई द्वारा लगाए गए प्रशिक्षण शिविरों में जिलाध्यक्ष को आमंत्रित नहीं किया गया। यहीं से संगठन की पुरानी गुटबाजी फिर सतह पर आ गई। पदाधिकारियों के बीच खिंची लकीरें और गहरी हुईं, जिसका असर एसआईआर अभियान पर साफ दिखा। कई बूथों से तय संख्या के मुताबिक बीएलए पहुंचे ही नहीं और प्रशिक्षण औपचारिकता बनकर रह गया।

नगर निगम की सियासत को लेकर चल रही थी खींचतान

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नगर निगम कार्यकारिणी समिति में प्रत्याशियों के नामों को लेकर पहले से चली आ रही तनातनी भी इस टकराव की पृष्ठभूमि बनी। एसआईआर शिविरों की अव्यवस्था की रिपोर्ट जैसे ही शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची, अखिलेश यादव ने संगठन को स्पष्ट संदेश देने के लिए सख्त फैसला लिया।

अब बरेली में नई कमान संभालने वाले शशांक यादव को ब्लॉक प्रभारियों को सक्रिय कर वोट निर्माण की रफ्तार बढ़ाने, फार्म-6, 7 और 8 भरवाने, अधिक से अधिक नए मतदाता जोड़ने और आपत्तियों के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं। संदेश साफ है, चुनावी तैयारी में गुटबाजी नहीं, सिर्फ परिणाम चाहिए। शशांक यादव लखीमपुर खीरी के रहने वाले हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं और एमएलसी रह चुके हैं।