
diwali 2018 : जानिए घर और कार्य स्थल पर लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त
बरेली। दीपों का पर्व दीपावली महालक्ष्मी की पूजा-उपासना का वार्षिक पर्व है। मान्यता है कि इस दिन की पूजा उपासना से ही यह निश्चित होता है कि आगामी वर्ष साधक के ऊपर महालक्ष्मी की कृपा कैसी रहेगी। बालाजी ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा ने बताया कि आज दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में करने का विधान है आधुनिक मुहुर्त शास्त्र की दृष्टि स्थिर लग्न में महालक्ष्मी पूजन श्रेष्ठ रहता है। प्रचलित परम्परा के अनुसार महालक्ष्मी पूजन कोषागार एवं पूजा कक्ष में करना चाहिए।
महालक्ष्मी पूजन मुहुर्त
गोधुली बेला - सांय 05:52 बजे से 06:15 बजे तक
वृश्चिक लग्न - प्रातः 07:15 बजे से 09: 34 बजे तक
कुंभ लग्न (व्यवसायिक) - दोपहर 01:20 बजे से 02:47 बजे तक
वृषभ लग्न (घर पर ) - सायं 05:48 बजे से सायं 06:43 बजे तक
सिंह लग्न (सिद्धिकाल) - मध्य रात्रि 00:22 बजे से 02:39 बजे तक
चर, लाभ, अमृत का चैघड़िया - प्रातः 10:49 बजे से दोपहर 03:05 बजे तक
सर्वश्रेष्ठ समय - सायं 05:48 बजे से 06:43 बजे तक
धनु लग्न:- दीपावली के दिन बुद्धवार को धनु लग्न प्रातः 09:37 बजे शुरू होगी। पूजन सुबह 09:20 बजे तक लाभ एवं अमृत के चैघड़िया मुहुर्त शुभ फलदायक रहेंगे।
कुम्भ लग्न:- दीपावली बुद्धवार के दिन अपराह्न 01:20 से 02:47 बजे के मध्य में कुम्भ लग्न रहेगी। दिन में 01:24 बजे से 02:46 बजे तक उद्वेग का चैघड़िया मुहुर्त रहेगा। जिसके स्वामी रवि श्रेष्ठ फलदायक रहेगें। लग्न अपने स्वामी से दृष्ट है। अतः बलवान कही जाएगी। श्री गणेश, लक्ष्मी, त्रिदेव, नवग्रह, बसना खाता, कलमदान पूजन करने से लाभोन्नती होगी।
वृष लग्न:- दीपमालिका दिन बुधवार के दिन सायंकाल 05:48 बजे से सायं 06:43 बजे तक प्रदोष के समय शुरू होकर रात्रि 19:55 बजे तक रहेगी। वृष लग्न पर बुद्ध- बृहस्पति की सप्तम दृष्टि तथा मंगल की चैथी दृष्टि पडे़गी, जो कि भौतिक विकास में लाभदायक रहेगी। रात्रिवेला में उद्वेग, शुभ, अमृत और चर के चैघड़िया मुहुर्त रात्रि 12:03 मिनट तक शुभ फलदायक रहेगें। प्रदोष के समय उद्वेग के चौघड़िया की व्याप्ति मनोकामनापूर्ति दायक रहेगी। लक्ष्मीपूजन प्रदोषकाल में सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
सिंह लग्न:- यह अपने आप में एक स्थिर लग्न मानी जाती है। अतः रात्रि 00:22 बजे से रात्रि 02:39 बजे तक लाभ के चौघड़िया मुहुर्त में यह समय साधना सिद्धी के लिए विशेष लाभदायक रहेगी।
दीपावली पर पितृ उपासना अवश्य करें
दीपावली पर अपराह्न के समय अपने पितृों के निमित दक्षिणाभिमुख होकर तर्पण कार्य अवश्य करें। ब्राह्मण को भोजन खिलाकर वस्त्र आदि का दान कर अपने पितृों का रूप समझें। पित्कर्म करने के पश्चात् पितृस्तोत्र का एक पाठ कर पितृों को समर्पित करें।
Published on:
07 Nov 2018 08:43 am

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