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नौकरी के घंटे पूरे होते ही रास्ते में मालगाड़ी खड़ा करके चला गया ड्राइवर

ड्राइवर ने नौकरी के 12 घंटे पूरे होने का हवाला दिया और रसुइया स्टेशन पर मालगाड़ी छोड़कर चला गया। जबकि उसे मालगाड़ी को रोजा तक ले जाना था।

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goods train

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बरेली। ट्रेनों के लेट होने से यात्रियों को तो परेशानी झेलनी ही पड़ती है, वहीं लोको पायलट को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। उन्हें ज्यादा घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ती है। इस परेशानी से तंग आकर एक मालगाड़ी ड्राइवर नौकरी के 12 घंटे पूरे होने का हवाला देकर मालगाड़ी को रसुइया स्टेशन पर खड़ा करके चला गया। जबकि उसे मालगाड़ी को लेकर रोजा स्टेशन तक जाना था। जब इस बात की जानकारी अफसरों को हुई तो हड़कंप मच गया। अफसरों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरपीएफ को लोको पायलट के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए, लेकिन कर्मचारी संगठनों के विरोध के चलते आदेश वापस ले लिया गया।

मालगाड़ी में खाद लेकर रोजा तक आना था
जानकारी के मुताबिक लोको पायलट को इफ्को से खाद लेकर रोजा स्टेशन जाना था। गुरुवार सुबह वो ड्यूटी पर आए और बरेली कैंट स्टेशन से खाली रैक लेकर इफ्को के लिए चले, लेकिन वहां पहुंचते पहुंचते उन्हें दो घंटे लग गए और इफ्को में खाद लोड होने में करीब आठ घंटे का समय लगा। इसके बाद वो खाद की रैक लेकर वापस चल दिए। जब तक वे कैंट स्टेशन पर पहुंचे तब तक उनकी ड्यूटी के 10 घंटे पूरे हो चुके थे। लिहाजा उन्होंने लूप लाइन पर गाड़ी खड़ी कर स्टेशन मास्टर को ड्यूटी पूरी होने का हवाला देकर वापस जाने की बात कही। इस पर स्टेशन मास्टर ने ड्राइवर की बात मुरादाबाद में अफसरों से कराई जिसके बाद उन्हें गाड़ी को रोजा तक ले जाने का आदेश दिया गया।

घर चला गया ड्राइवर
बताया जा रहा है कि इसके बाद ड्राइवर मालगाड़ी लेकर चला। जब तक वो रसुइया स्टेशन पर पहुंचा, तब तक ड्यूटी के 12 घंटे पूरे हो चुके थे। 12 घंटे पूरे होते ही ड्राइवर ने मालगाड़ी को रसुइया स्टेशन पर ही खड़ा कर दिया और स्टेशन मास्टर को ड्यूटी पूरी होने के बारे में बताया और घर चला गया। जब मालगाड़ी के बीच रास्ते में ही खड़े होने की खबर अफसरों को मिली तो हड़कंप मच गया। अफसरों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आरपीएफ को ड्राइवर के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए। लेकिन मुरादाबाद में कर्मचारी संगठनों ने इसका विरोध किया तो अफसरों ने आदेश वापस ले लिए।

गलत है आठ घंटे से ज्यादा की ड्यूटी
नियमानुसार लोको पायलट से आठ घंटे की ड्यूटी लेने का आदेश है। जरूरत पड़ने पर 10 घंटे की ड्यूटी ली जा सकती है और अगर बहुत इमरजेंसी है तो 12 घंटे तक ड्यूटी कराई जा सकती है। इससे ज्यादा काम नहीं लिया जा सकता। लेकिन इस मामले में ड्राइवर की ड्यूटी के 12 घंटे पूरे हो चुके थे। इसके कारण वो ट्रेन छोड़ चला गया। अगर अफसर उस पर कार्रवाई करते तो अफसरों की गर्दन भी फंस सकती थी।


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