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एल्डिको झील : 30 अक्टूबर को एनजीटी करेगा अंतिम सुनवाई, कंपनी को लगाई फटकार, घर लेने वालों का हो सकता है आर्थिक नुकसान

एल्डिको सिटी के भीतर स्थित झील के अस्तित्व को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने बुधवार को महत्वपूर्ण सुनवाई की। एनजीटी ने प्रतिवादियों द्वारा दाखिल जवाबों को संज्ञान में लेते हुए याचिकाकर्ता को तीन सप्ताह के भीतर अपना उत्तर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

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बरेली। एल्डिको सिटी के भीतर स्थित झील के अस्तित्व को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने बुधवार को महत्वपूर्ण सुनवाई की। एनजीटी ने प्रतिवादियों द्वारा दाखिल जवाबों को संज्ञान में लेते हुए याचिकाकर्ता को तीन सप्ताह के भीतर अपना उत्तर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही, मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 30 अक्टूबर 2025 की तिथि तय की गई है।

एनजीटी की प्रधान पीठ — जिसमें चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिलवेल और डॉ. अफरोज अहमद शामिल थे — ने दो अलग-अलग याचिकाओं पर संयुक्त रूप से सुनवाई की। ये याचिकाएं सियाराम मंडल व राजपाल सिंह द्वारा दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शिवानी, चंद्रकेतु, राजपाल सिंह और रामबाबू ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अंकित वर्मा और यूपीपीसीबी (उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) की ओर से श्वेता अरोड़ा सहित अन्य अधिवक्ता उपस्थित रहे।

एनजीटी ने सुनवाई के दौरान अधिकारियों की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई और कहा कि संबंधित विभागों को झील की स्थिति की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे झील का अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त होता गया। ट्रिब्यूनल ने झील की उपग्रह और भौगोलिक तस्वीरों का हवाला देते हुए मामले की गंभीरता को रेखांकित किया।

एल्डिको कंपनी की मुश्किलें बढ़ीं

एनजीटी ने एल्डिको कंपनी को कड़ी फटकार लगाते हुए साफ कर दिया कि अब उसे आगे की सुनवाई में कोई अतिरिक्त अवसर नहीं दिया जाएगा। प्रतिवादियों की सुनवाई को पूर्ण मानते हुए ट्रिब्यूनल ने संकेत दिया कि अगली सुनवाई निर्णायक होगी। मामले में एल्डिको सिटी के निवासियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

भ्रष्ट अधिकारियों पर गिर सकती है गाज

सुनवाई के बाद याचिकाकर्ताओं और उनके अधिवक्ताओं ने कहा कि अब इस पूरे मामले की सच्चाई उजागर होने वाली है। झील को मिटाने में एल्डिको कंपनी की भूमिका तो सामने आई ही है, साथ ही उन भ्रष्ट अधिकारियों पर भी बड़ी कार्रवाई संभव है, जिन्होंने कंपनी का खुलकर साथ दिया और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी की। एनजीटी की सक्रियता और स्पष्ट निर्देशों से याचिकाकर्ताओं ने संतोष जताया है। अब सभी पक्षों की अंतिम दलीलों के साथ यह मामला 30 अक्तूबर को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। यह दिन एल्डिको झील प्रकरण के भविष्य की दिशा तय करेगा।

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