गर्मी शुरू होते ही बिजली से बरेली वासियों की नींद उड़ गई है। दिन रात बिजली कटौती हो रही है। जनवरी से मार्च तक व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने के लिए जैसे प्रयास होने चाहिए थे, वैसे नहीं हुए। महकमा राजस्व वसूली में फंसा रहा, अब गर्मी बढ़ने के कारण लोड बढ़ना शुरू हो गया है। जाहिर है कि तैयारी नहीं की है इसलिए लोकल फॉल्ट, ट्रिपिंग और ओवरलोडिंग विभाग को परेशान कर रही है। इस लापरवाही का असल खामियाजा जनता भुगत रही है।
जरूरत से काफी कम है उपलब्धता
बरेली की बात करें तो यहां करीब 45 लाख की आबादी पर करीब पौने चार सौ से सवा चार सौ मेगावाट बिजली की आवश्यकता है। इसके सापेक्ष जिले में सिर्फ तीन सौ से साढ़े तीन सौ मेगावाट बिजली की ही उपलब्धता हो रही है। गर्मियों में इस अंतर काे बढ़ने की भी आशंका बनी रहती है। जिले में स्थापित चीनी मिलें करीब पचास मेगावाट बिजली का ही उत्पादन कर पाती हैं। इससे भी जिले की विद्युत कमी को पूरा नहीं किया जा रहा है।
ट्रांसफार्मरों की हालत भी ख़राब
जिले में ट्रांसफार्मरों की स्थिति काफी खराब है। शहर में करीब 72 ट्रांसफार्मर हैं। सभी ट्रांसफार्मर क्षमता से अधिक ओवरलोड हैं। आलम यह है कि एक ट्रांसफार्मर पर दो से ढा़ई सौ केवी तक का लोड आ जाता है। हालत यह है कि कई बार लोड देते ही नया ट्रांसफार्मर भी धमाके के साथ फुंक जाता है। कुछ उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि कर ट्रांसफार्मरों का लोड बांटा गया है, जो भीषण गर्मी में नाकाफी साबित होगा।