
बरेली। हज जाने वाले यात्रियों से कुर्बानी के नाम पर होने वाली ठगी की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। अब हज के दौरान कुर्बानी के लिए जानवरों की खरीद केवल सऊदी सरकार द्वारा अधिकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही की जाएगी। इस फैसले से निजी स्तर पर होने वाली अनियमितताओं और धोखाधड़ी की घटनाओं पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
Haj Committee of India ने कुर्बानी को लेकर महत्वपूर्ण सर्कुलर जारी किया है। सर्कुलर के अनुसार सऊदी अरब सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हज के दौरान कुर्बानी के जानवर की खरीद केवल नुसुक मसार पोर्टल पर उपलब्ध आधिकारिक अदाही प्रोजेक्ट के माध्यम से ही की जाएगी। किसी भी निजी एजेंसी, दलाल या अनधिकृत व्यवस्था के जरिए कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी।
सर्कुलर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी तीर्थयात्रियों के लिए कुर्बानी अनिवार्य नहीं है। हालांकि जिन यात्रियों ने Haj Committee of India के पोर्टल पर कुर्बानी का विकल्प चुना है, उन्हें 28 फरवरी 2026 तक अपनी लॉगिन आईडी और एम-पिन के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। तय तिथि के बाद अदाही विकल्प में किसी प्रकार का संशोधन या परिवर्तन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक पम्मी खान वारसी ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे हज यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और कुर्बानी के नाम पर होने वाली जालसाजी पर प्रभावी रोक लगेगी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष कई मामलों में कुछ लोग कुर्बानी का ठेका लेकर धोखाधड़ी करते पाए गए। एक ही जानवर की अलग-अलग एंगल से फोटो खींचकर अलग-अलग यात्रियों को दिखाकर संतुष्ट कर दिया जाता था। इस प्रकार यात्रियों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जाता रहा। नई व्यवस्था के लागू होने से कुर्बानी की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित होने की उम्मीद है।
Published on:
22 Feb 2026 09:26 pm
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