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हल्द्वानी की गफूर बस्ती वीरान, मुस्लिम बस्ती छोड़कर भाग रहे

हल्द्वानी की गफूर बस्ती में सन्नाटा पसरा है। घरों पर ताले लटक रहे हैं। गलियों में पुलिस का पहरा है। मुस्लिम बस्ती को छोड़कर पलायन हो गए।

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गफूर बस्ती और गांधी नगर से परिवार सामान लेकर जा रहे हैं। हिंसा के बाद गफूर बस्ती में घरों में ताला लटक रहे हैं।

8 फरवरी को हल्द्वानी के बगीचा, गांधीनगर और बनभूलपुरा थाना सहित तीन जगह हिंसा हुई थी। इसके बाद से पुलिस सर्च ऑपरेशन चला रही है। पुलिस लोगों को उठाकर ले जा रही है। परवीन, आयशा और अनीसा के घर वालों को पुलिस उठाकर ले गई। इन लोगों को भी नहीं पता ‌कि पुलिस वाले कहां लेकर गए। बस्ती के लोगों को कहीं बाहर भी नहीं जाने दिया जा रहा है। घर में खाने का सामान भी खत्म हो गया। कुछ लोग अपने घरों में ताला लगाकर पलायन कर रहे हैं।

‌हल्द्वानी हिंसा के मास्टरमाइंड का आरोपी रेलवे कॉन्ट्रैक्टर है
हल्द्वानी हिंसा का मास्टरमाइंड का आरोपी अब्दुल मलिक रेलवे का कॉन्ट्रैक्टर है। उसे ही तोड़ी गई मस्जिद और मदरसे की जमीन का मालिक बताया जा रहा है। अब्दुल मलिक अभी तक गिरफ्तार नहीं हो पाया है। एसएसपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बात बताया।

अब्दुल मलिक और उसकी पत्नी सफिया मलिक कर रहीं थे देखरेख
मरियम मस्जिद और अब्दुल रज्जाक जकारिया मरदसा 2002 में बनभूलपुरा के कंपनी बाग में बनाया गया था। इसे ही अवैध बताकर तोड़ी गई। इसके बाद हल्द्वानी में हिंसा हुई। इसकी देखरेख अब्दुल मलिक और उसकी पत्नी सफिया मलिक देखरेख में कर रहीं थीं। सफिया मलिक ने 6 फरवरी को उत्तराखंड हाईकोर्ट में बताया की इस जमीन को 1937 में पट्टे में मिला था। 1994 से जमीन उनके परिवार के पास है।

रिन्यू करने की एप्लिकेशन 2007 से जिला प्रशासन के पास है
सफिया मलिक ने बताया कि पट्टा रिन्यू करने की एप्लिकेश 2007 से जिला प्रशासन के पास है। इस जमीन पर सफिया मदरसा चलाती थीं। सफिया ने कोर्ट में बताया कि 27 जनवरी को नगर निगम ने बिना नोटिस के ही जमीन खाली कराने की कोशिश की। 30 जनवरी को नगर निगम ने अब्दुल मलिक को नोटिस भेजा। सफिया मलिक के अनुसार नोटिस पर लिखा था ‌कि उत्तराखंड नजूल पॉलिसी 2021 और नगर निगम एक्ट 2009 के तहत 1 फरवरी तक मस्जिद और मदरसा नहीं तोड़ा या खाली नहीं किया तो नगर निगम उसे तोड़ देगा।

विवादित जमीन की क्या है पूरी कहानी
नजूल की जमीन पर बनी मस्जिद का मालिकाना हक 1937 में मोहम्मद यासीन को दिया गया था। उन्होंने इस जमीन को अख्तरी बेगम और नबी रजा खान को बेची। 1994 में अख्तरी बेगम ने इसे मलिक के पिता अब्द़ुल हमीद खान को तोहफे में दिया।

साल 2007 में हाईकोर्ट में याचिका लगाई
साल 2006 में अब्दुल हमीद खान ने संपत्ति पर फ्री होल्ड अधिकार देने के लिए नैनीताल प्रशासन से संपर्क किया। 2007 तक सुनवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट में याचिका लगाई। साल 2013 में अब्दुल हमीद खान और 2018 में उनकी पत्नी का निधन हो गया। तब से सफिया मलिक मस्जिद और मदरसे की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। सफिया मलिक का दावा है कि 2020 के दिसंबर में हल्द्वानी नगर निगम ने मदरसे का एक हिस्सा तोड़ दिया थ्‍ज्ञा। सफिया ने एकतरफ कार्रवाई का आरोप लगाकर हल्द्वानी मेयर को लेटर लिखा था। अब मामल कोर्ट में है।

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