
संसार का कोई भी व्यक्ति सदैव हमारा साथ नहीं दे सकता
पंडित बृजेश ने कहा कि संसार का कोई भी व्यक्ति सदैव हमारा साथ नहीं दे सकता। साथी भी साथ देंगे तो केवल श्मशान तक, पत्नी भी साथ देगी तो केवल मकान तक, लड़का भी साथ देगा तो केवल अग्नि दान तक, इसके तो आगे भजन ही है साथी हरि के भजन बिन अकेला रहेगा। आजकल अकेलापन लोगों को खाए जा रहा है। वृद्ध लोग परेशान है कहते हैं सब कुछ है पुत्र है पौत्र है नौकर चाकर है बात अनुकूलित कक्ष भी है। सब कुछ है पर हम अकेले हैं और इस अकेलेपन को मिटाने का कोई उपाय भी नहीं है। क्योंकि यह हमारा स्वभाव है स्वभाव का अर्थ है जिसे मिटाया न जा सके।
आज तक जिसको भी प्रभु मिले हैं अकेले में ही मिले है
आप भगवान को अपना साथी बना ले जो लोक में ही नहीं परलोक में भी साथ देते हैं। वहीं जीव के सच्चे साथी हैं। अकेलेपन को अपना सौभाग्य माने भगवान ने कृपा की है यह अकेलेपन की लहर ही आपको परमात्मा तक ले जाएगी। यह अकेलेपन के रथ पर बैठकर ही आप अपने प्रभु को प्राप्त कर सकेंगे। आज तक जिसको भी प्रभु मिले हैं अकेले में ही मिले हैं। इसलिए अकेलेपन को अवसाद न बनाएं बरन भगवान को साथी बनाकर भक्ति का स्वाद ले। आपका जीवन धन्य हो जाएगा। कथा के प्रारंभ में कथा व्यास का स्वागत पंडित मनमोहन झा ने किया। कथा में देवेंद्र चड्ढा, ओम प्रकाश कोचर, अशोक नारंग, हेमंत दुआ आदि मौजूद रहे।
Published on:
19 Nov 2023 06:45 pm

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