
दस अंगुलियों में अंगूठियां और सोने की मोटी चेनों की लड़ियां पहनने के कारण मयंक को गोल्डन बाबा और बप्पी लहरी कहते थे।
पिस्टल से कनपटी पर सटाकर मारी गई थी गोली
अंकुर सब्बरवाल की बीडीए आफिस के नीचे चिकन व कबाब कार्नर की दुकान है। तीन मई, 2023 की रात 11 बजे कार में सवार किला निवासी मयंक रस्तोगी व उसके साथी ताजीम शमसी वहां पहुंचे। उन्होंने कबाब का आर्डर किया। इसके बाद कबाब की गुणवत्ता खराब बताकर रुपये देने से इनकार कर दिया। नसीर ने कहा कि अभी के 120 रुपये दे दो। अगली बार से खाने मत आना। आरोपियों ने गाली गलौज शुरू कर दी। इसके बाद नसीर की कनपटी पर सटाकर गोली मार दी और फरार हो गए। मरणासन्न हालत में घायल कारीगर को निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल थी।
कार के नंबर से ट्रेस हुआ था मयंक रस्तोगी
घटना के बाद दुकान के पास खड़े लोगों कार का फोटो खींच लिया था। कार नंबर से पता लगा कि गाड़ी सर्राफ मयंक रस्तोगी की है। इसके बाद पुलिस ने उसे फोन किया। उसने अपनी लोकेशन गुजरात बताई। पुलिस ने कहा कि तुम्हारी लोकेशन तो रामपुर के पास मिलक में दिखा रही। इसके बाद मयंक ने फोन बंद कर लिया था। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
आठ लोगों की हुई गवाही, 11 माह में ही आया फैसला
मयंक ने पिता अनिल के लाइसेंसी रिवाल्वर से से गोली मारी थी। रिवाल्वर छिपाने के बाद वह साथी के साथ भाग गया था। पुलिस ने बाद में रिवाल्वर बरामद किया था। लाइसेंसी शस्त्र के दुरुपयोग पर आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया था। मयंक पुलिस की वर्दी पहनकर लोगों पर रौब भी झाड़ता था। इस मामले में कोर्ट के ट्रायल के दौरान अंचित द्विवेदी ने आठ गवाह पेश किए। गवाही और पुलिस के ठोस सबूतों, रिवाल्वर से घटना की पुष्टि हुई। जिस पर एडीजे कोर्ट ने दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दी। एफआईआर दर्ज होने से लेकर चार्जशीट और केार्ट का फैसला आने में केवल 11 माह लगे।
Updated on:
21 Mar 2024 06:24 pm
Published on:
21 Mar 2024 05:15 pm
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