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थाने-थाने महिला सुरक्षा का युद्धघोष, मिशन शक्ति को ‘ब्रांड’ बनाने उतरे यूपी डीजीपी

उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को लेकर अब कोई आधा-अधूरा सिस्टम नहीं चलेगा। मिशन शक्ति को लेकर यूपी पुलिस का रुख साफ और सख्त है कि यह अब केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि हर थाने पर दिखने वाला भरोसेमंद ब्रांड बनेगा।

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बरेली। उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को लेकर अब कोई आधा-अधूरा सिस्टम नहीं चलेगा। मिशन शक्ति को लेकर यूपी पुलिस का रुख साफ और सख्त है कि यह अब केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि हर थाने पर दिखने वाला भरोसेमंद ब्रांड बनेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश और डीजीपी राजीव कृष्ण के नेतृत्व में मिशन शक्ति फेज-5 के तहत बरेली रेंज से महिला सुरक्षा का आक्रमक मॉडल शुक्रवार को पूरी ताकत के साथ सामने आया।

जीआईसी ऑडिटोरियम में आयोजित मिशन शक्ति कौशल कार्यशाला का शुभारम्भ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुआ। इसमें बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर के पुलिस और प्रशासनिक अफसर, डॉक्टर, मनोवैज्ञानिक, काउंसलर और परिवार परामर्श केंद्रों के प्रभारी एक मंच पर जुटे।

हर थाने पर एक जैसा व्यवहार, एक जैसे नतीजे: डीजीपी

कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीजीपी राजीव कृष्ण ने साफ कहा अब प्रदेश में कहीं भी महिला या पीड़िता को अलग-अलग स्तर की सेवा नहीं मिलेगी। हर मिशन शक्ति केंद्र के लिए न्यूनतम सेवा मानक (मिनिमम स्टैंडर्ड्स) तय किए जाएंगे। चाहे शहर हो या गांव, हर थाने पर महिला को समान संवेदनशीलता, समान गुणवत्ता और समान परिणाम मिलेंगे। यही मिशन शक्ति की पहचान होगी।

संवेदनशीलता से बदली तस्वीर, अपराधों में बड़ी गिरावट

डीजीपी ने बताया कि संवाद, संवेदनशीलता और कम्युनिटी आउटरीच का असर अब जमीन पर दिख रहा है। इलोपमेंट और सामाजिक अपराधों में लगातार गिरावट, बलात्कार के मामलों में करीब 33 प्रतिशत कमी, दहेज हत्या जैसे जघन्य अपराधों में लगभग 13 प्रतिशत की गिरावट आई है। ये आंकड़े बताते हैं कि सख्त कानून के साथ मानवीय पुलिसिंग अपराध नियंत्रण का सबसे मजबूत हथियार बन रही है।

अब सिर्फ एफआईआर नहीं, समाधान प्राथमिकता

मिशन शक्ति केंद्रों को अब केवल शिकायत दर्ज करने की जगह नहीं रखा गया है। यह संवाद, प्री-एफआईआर काउंसलिंग, कानूनी सहायता, मेडिकल रेफरल और पोस्ट-ट्रॉमा केयर का एकीकृत मंच बन चुका है। फेज-5 में हर थाने पर मिशन शक्ति केंद्र स्थापित कर महिलाओं की समस्याओं को एफआईआर की दहलीज से पहले ही सुलझाने पर जोर दिया जा रहा है। डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी से समन्वय कर मुफ्त कानूनी मदद और सरकारी-निजी अस्पतालों से तालमेल कर इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। कई मामलों में पीड़ित महिलाओं को नया और सुरक्षित जीवन मिल सका है।

पहले 10 मिनट का फार्मूला, यहीं तय होती है दिशा

कार्यशाला में यह बात विशेष रूप से रेखांकित की गई कि पीड़िता से बातचीत के शुरुआती 10 मिनट उसकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल सकते हैं। बिना जजमेंट सुने जाना, सम्मान और सहानुभूति दिखाना अपने आप में बड़ी राहत है। गंभीर मामलों में पीड़िता की सहमति से गोपनीय मानसिक स्वास्थ्य रेफरल को भी मजबूती दी जा रही है। महिला बीट और मिशन शक्ति केंद्रों की फील्ड मूवमेंट बढ़ाने के लिए प्रत्येक थाने पर चार-चार स्कूटी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।

वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन, फील्ड से अनुभव

कार्यशाला में एडीजी बरेली जोन रमित शर्मा और कमिश्नर भूपेन्द्र एस. चौधरी ने दिशा-निर्देश दिए। डीआईजी रेंज अजय कुमार साहनी ने प्रभावशाली केस स्टडी साझा कीं। महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की एडीजी पद्मजा चौहान ने हाइब्रिड मोड में विचार रखे। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने प्रशासनिक समन्वय पर जोर दिया। एसएसपी अनुराग आर्य ने सभी प्रतिभागियों का आभार जताते हुए उत्कृष्ट कार्य करने वाली टीमों, आंवला परिवार परामर्श केंद्र के परामर्शदाताओं और अतिथि वक्ताओं को सम्मानित किया।

एक मंच, कई समाधान

सीडीओ देवयानी ने महिला सशक्तिकरण योजनाओं पर प्रस्तुति दी। जय गोविंद सिंह ने परिवार परामर्श केंद्र के जरिए 100 से अधिक टूटते परिवारों को जोड़ने के अनुभव साझा किए। एसआरएमएस के डॉक्टरों ने मेडिकल जूरिसप्रुडेंस और मनोविज्ञान पर सत्र लिए। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. मनाली ने यौन हिंसा पीड़िताओं से संवेदनशील संवाद की एसओपी बताई। वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. शांतनु ने महिला अपराधों की विवेचना की मानक प्रक्रिया समझाई।

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