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एक हसरत थी कि आंचल का मुझे प्यार मिले…दुर्लभ बीमारी से निशांत की हॉस्पिटल में मौत, नहीं मिला पिता का साया

आठ साल से दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे निशांत की एसआरएमएस में मौत हो गई। मौत के वक्त न उसे मां का आंचल मिला ना पिता का साया। शायद गीत की लाइनें इसी हालत पर मौजूं हैं।

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बरेली। आठ साल से दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे निशांत की एसआरएमएस में मौत हो गई। मौत के वक्त न उसे मां का आंचल मिला ना पिता का साया। शायद गीत की लाइनें इसी हालत पर मौजूं हैं। एक हसरत थी कि आंचल का मुझे प्यार मिले, मैंने जज्बात के संग खेलते दौलत देखी, अपनी आंखों से मोहब्बत की तिजारत देखी, तेरे दामन में बता मौत से ज्यादा क्या है। जिंदगी और बता तेरा इरादा क्या है। बरेली के श्रीराममूर्ति स्मारक मेडिकल कॉलेज (SRMS) में भर्ती निशांत का निधन हृदयाघात (कार्डियक अरेस्ट) के कारण हुआ। दुर्भाग्यवश, इस अंतिम क्षण में न तो उसकी मां का आंचल उसे मिला और न ही पिता का साया। मेडिकल कॉलेज स्टाफ, जिसने उसके इलाज की जिम्मेदारी निभाई, ने प्रशासन को सूचित कर अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। इस बीच, निशांत के पिता ने आरोप लगाया कि उन्हें बेटे की मृत्यु की सूचना ही नहीं दी गई थी।

2016 में बीमार पड़ा था निशांत

निशांत, जो कभी सामान्य बच्चों की तरह खेलता और पढ़ता था, वर्ष 2016 में अचानक बीमार पड़ने लगा। उस समय उसकी उम्र 11 वर्ष थी और वह कक्षा छह में पढ़ता था। 16 जुलाई 2016 को उसके पिता कांता प्रसाद गंगवार ने उसे श्रीराममूर्ति मेडिकल कॉलेज (SRMS) में भर्ती कराया, जहाँ डॉक्टरों ने दुर्लभ बीमारी गुलियन बैरे सिंड्रोम की पुष्टि की। निशांत की हालत धीरे-धीरे गंभीर होती गई, और वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गया।

मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और स्वजनों के बीच विवाद
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि निशांत के परिवार ने उसे अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उसकी देखभाल की जिम्मेदारी छोड़ दी। परिवार के नहीं लौटने के कारण, मेडिकल स्टाफ ने उसकी देखभाल शुरू की। प्रबंधन ने दावा किया कि इलाज के दौरान कई बार स्वजनों को सूचित किया गया, लेकिन वे नहीं आए। दूसरी ओर, निशांत के पिता कांता प्रसाद गंगवार ने आरोप लगाया कि उन्हें बेटे की मृत्यु की सूचना नहीं दी गई थी, और वे इससे अनजान थे।

अस्पताल स्टाफ ने की देखभाल
मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग स्टाफ ने निशांत की देखभाल के लिए कई प्रयास किए। कुछ दिन पहले उसकी जन्मतिथि पर, स्टाफ ने उसका तिलक किया और केक काटा ताकि निशांत को अपने परिवार से दूर रहने का दर्द कम महसूस हो।

मेडिकल प्रबंधन का पक्ष
मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि निशांत की कार्डियक अरेस्ट की सूचना दो दिन पहले ही जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन को दी गई थी। शुक्रवार सुबह निशांत की मृत्यु हो गई, जिसके बाद जिला प्रशासन से अंतिम संस्कार के निर्देश मांगे गए। भोजीपुरा थाने की पुलिस ने पहुंचकर पंचनामा भरा और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

गुलियन बैरे सिंड्रोम क्या है?
गुलियन बैरे सिंड्रोम एक दुर्लभ और लाइलाज ऑटोइम्यून विकार है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नर्वस सिस्टम पर हमला करती है। इसके परिणामस्वरूप मांसपेशियों में कमजोरी और दर्द होता है, और धीरे-धीरे व्यक्ति लकवाग्रस्त हो जाता है। रोगी सर्दी, गर्मी और अन्य संवेदनाओं को महसूस नहीं कर पाता, जिससे जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

निशांत का अंतिम संस्कार
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौंपी, जिन्होंने एक स्वयंसेवी संस्था की मदद से निशांत का अंतिम संस्कार कराया।

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