
आईपीएस विक्रम दहिया, मनोज रावत, डॉ. नताशा गोयल, शिवम आशुतोष और सोनाली मिश्रा
बरेली। बरेली में आयोजित शानदार इन्फ्लुएंसर्स मीट में आईपीएस आफिसर्स ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल के चक्कर में ऐसा कंटेट न बनायें, जिससे कि माहौल खराब हो। बरेली पुलिस लाइन स्थित रविंद्रालय में Connect Bareilly Zone Influencers Meet UP-2026 में आईपीएस अफसरों ने मंच संभाला। उन्होंने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से कहा कि कंटेंट ऐसा हो जो समाज में जागरूकता फैलाए, नफरत नहीं।
मीट के दौरान इन्फ्लुएंसर्स के दिये गये सुझावों के आधार पर साइबर फ्राड, ट्रैफिक नियमों, मिशन शक्ति, सोशल मीडिया के कानूनों को लेकर डिजिटल क्लास में टिप्स दिये गये। आईपीएस अफसरों ने पीपीटी के माध्यम से अनूठे अंदाज में सभी को सोशल मीडिया की रेडलाइन, कंटेट, कानूनों के बारे में बताया। महिला सुरक्षा, सामाजिक वैमनष्यता को बढ़ावा देने वाले कंटेंट, फेक न्यूज और आईटी एक्ट पर खुलकर चर्चा हुई। पुलिस अफसरों ने कहा कि एक गलत पोस्ट माहौल बिगाड़ सकती है, इसलिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इन्फ्लुएंसर्स की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा है। सामाजिक जागरुकता को बढ़ाने और सदभाव, सौहार्द को बनाये रखने में उनकी अहम भूमिका है।
पीलीभीत के अपर पुलिस अधीक्षक विक्रम दहिया ने साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन फ्रॉड पर विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि किस तरह साइबर अपराधी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। उन्होंने साइबर हेल्प डेस्क, साइबर पुलिस स्टेशन की कार्यप्रणाली समझाते हुए कहा कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। ऑनलाइन ठगी, फेक लिंक, सोशल मीडिया फ्रॉड और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ नहीं होता है। इससे बचें, अपनी मेलआईडी और पासवर्ड संभाले, पर्सनल और प्रोफेशन ईमेल अलग अलग रखें।
संभल के अपर पुलिस अधीक्षक मनोज रावत ने सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों पर जोर देते हुए कहा कि हेलमेट और सीट बेल्ट अब विकल्प नहीं, जीवन बचाने की जरूरत हैं। उन्होंने ओवरस्पीडिंग, लापरवाही से वाहन चलाने और ट्रैफिक नियम तोड़ने के खतरनाक परिणामों को उदाहरणों के जरिए समझाया। साथ ही कहा कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स सड़क सुरक्षा जागरूकता फैलाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कुछ क्रिकेटर्स और सेलेब्रिटी की दुर्घटनाओं में हुई मौत का उदाहरण देते हुये ट्रैफिक नियमों का पालन करने और इस तरह के कंटेट बनाकर समाज में जागरुकता लाने के निर्देश दिये।
पीलीभीत की सहायक पुलिस अधीक्षक डॉ. नताशा गोयल ने नए आपराधिक कानूनों और आईटी एक्ट की बारीकियों को बेहद आसान तरीके से समझाया। उन्होंने पीपीटी के माध्यम से बताया कि सोशल मीडिया पर डाला गया कोई भी कंटेंट कानूनी जांच के दायरे में आ सकता है। उन्होंने डिजिटल साक्ष्यों की वैधानिकता, साइबर अपराधों की जांच प्रक्रिया और सोशल मीडिया दुरुपयोग के मामलों पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही चेताया कि बिना तथ्य जांचे पोस्ट किया गया कंटेंट गंभीर कानूनी कार्रवाई की वजह बन सकता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कुछ केस और बीएनएस की नई धाराओं के साथ सामाजिक, जातिगत भेदभाव, व्यक्तिगत और देश विरोधी कानूनों के बारे में जानकारी दी।
बरेली की सहायक पुलिस अधीक्षक सोनाली मिश्रा ने महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण पर विशेष सत्र लिया। उन्होंने इन्फ्लुएंसर्स से कहा कि सोशल मीडिया महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को मजबूत करने का बड़ा मंच बन सकता है। उन्होंने वुमन पावर हेल्पलाइन 1090, एंटी रोमियो स्क्वॉड, परिवार परामर्श केंद्र और महिला सुरक्षा अभियानों की जानकारी देते हुए संवेदनशील मुद्दों पर जिम्मेदार कंटेंट बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि 1090 ऐसी हेल्पलाइन है जहां शिकायत करने वाले का नाम पता गोपनीय रखा जाता है। उन्होंने थानों में बनाये गये वात्सल्य कक्ष, मिशन शक्ति केंद्रों के बारे में जानकारी दी। किस तरह से महिलाएं आसान तरीके से अपनी बात उचित प्लेटफार्म पर रख सकती हैं। जहां उनकी सुरक्षा, सम्मान और गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाता है।
बरेली के सहायक पुलिस अधीक्षक शिवम आशुतोष ने डिजिटल कंटेंट से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर विशेष सत्र लिया। उन्होंने साफ कहा कि ऐसा कोई भी कंटेंट, जिससे किसी धर्म, वर्ग या समुदाय की भावनाएं आहत हों, कानूनन आपत्तिजनक हो सकता है। उन्होंने फेक न्यूज, भ्रामक सूचनाओं और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले पोस्ट से बचने की सलाह देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पहले तथ्य, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी को समझना बेहद जरूरी है। वायरल के चक्कर में ऐसा कंटेट नहीं पोस्ट करना चाहिये, जिससे सामाजिक ताना बाना और सौहार्द प्रभावित हो।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि सोशल मीडिया अब सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा डिजिटल हथियार बन चुका है। ऐसे में कंटेंट क्रिएटर्स की जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। कार्यक्रम में मौजूद इन्फ्लुएंसर्स ने भी पुलिस अधिकारियों के साथ खुलकर संवाद किया और डिजिटल जागरूकता अभियानों में सहयोग देने का भरोसा दिलाया। पहली बार इस तरह की मीट को लेकर पुलिस अधिकारी और इन्फ्लुएंसर्स उत्साहित नजर आये। हालांकि एडीजी जोन रमित शर्मा ने एसएमआई (सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स) की शुरुआत 2015 में ही कर दी थी। जब वह डीआईजी मेरठ रेंज थे। उस वक्त देश की पहली मीडिया लैब यूपी पुलिस ने मेरठ में तैयार की थी। इसके बाद ही यूपी पुलिस टिवटर और सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफार्म पर सक्रिय हुई। 2016 में डीजीपी ने इसका सर्कुलर भी जारी किया था। 11 साल पहले शुरू हुई एक छोटी सी मुहिम अब बड़ा आकार ले रही है।
Published on:
24 May 2026 10:06 pm
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