
सौरभ राठौर और बीजेपी नेता पप्पू गिरधारी
बरेली। कागजों की बाज़ीगरी और खाकी की सांठगांठ ने एक बार फिर सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जोगीनवादा गोलीकांड के नामजद आरोपी सौरभ राठौर का आपराधिक इतिहास छिपाकर पासपोर्ट बनवाने में बारादरी थाने के दरोगा और सिपाही फंस गए हैं।
जोगी नवादा का सौरभ राठौर कोई और नहीं बीजेपी के चर्चित नेता पप्पू गिरधारी का भतीजा है। उत्तराखंड में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति पप्पू गिरधारी हाल ही में बिहार की महिलाओं को लेकर विवादास्पद टिप्पणी के मामले में चर्चा में आए थे। शिकायत पर कराई गई जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद अनुराग आर्य ने दोनों पुलिसकर्मियों पर सात दिन के वेतन के बराबर अर्थदंड ठोक दिया है। साथ ही आरोपी का पासपोर्ट निरस्त कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
जोगीनवादा निवासी सौरभ राठौर इलाके का कुख्यात चेहरा माना जाता है। दबंगई, फायरिंग और जानलेवा हमलों की उसकी पुरानी हिस्ट्री से न तो मोहल्ला अनजान है और न ही बारादरी पुलिस। दिसंबर 2024 में अधिवक्ता रीना सिंह के परिवार पर साथियों संग हमला—और उससे पहले भी कई आपराधिक वारदातें। इसके बावजूद 12 नवंबर 2024 को बारादरी थाने के दरोगा रोहित शर्मा और सिपाही दीपक तोमर ने भ्रामक रिपोर्ट लगाकर उसे “क्लीन” बता दिया। चौंकाने वाली बात यह कि यह खेल 2025 में उजागर हुआ, तब जाकर सिस्टम हिला।
मामला सामने आते ही मो. अकमल खान को जांच सौंपी गई। जांच में साफ हुआ कि सौरभ राठौर के खिलाफ आठ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं—जिनमें जानलेवा हमला, बलवा और आर्म्स एक्ट जैसे संगीन मामले शामिल हैं। मगर पासपोर्ट सत्यापन की रिपोर्ट में केवल एक ऐसे मुकदमे का जिक्र किया गया, जिसमें आरोपी पहले ही दोषमुक्त हो चुका था। यहीं खुल गई “वर्दी वाली रिपोर्ट” की पोल।
जांच रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी अनुराग आर्य ने दरोगा रोहित शर्मा और सिपाही दीपक तोमर को दोषी मानते हुए विभागीय कार्रवाई की और दोनों पर सात दिन के वेतन के बराबर अर्थदंड लगा दिया। साथ ही सौरभ राठौर का पासपोर्ट निरस्त कराने के निर्देश देकर कागजी खेल पर ब्रेक लगाने की कोशिश की गई है।
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Published on:
16 Jan 2026 12:15 pm

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