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मिशन 2027 : जिलाध्यक्ष हटते ही फाड़े गए पोस्टर, सपा की अंदरूनी जंग कहीं तोड़ न दे चुनावी ख़्वाब

बरेली। एक तरफ समाजवादी पार्टी मिशन 2027 को लेकर सत्ता पक्ष पर हमलावर है। सरकार बनाने के ख्वाब देख रही है, तो दूसरी तरफ संगठन के भीतर इतना ज़हर भरा है कि जिलाध्यक्ष का पद छूटते ही उनके नाम-निशान तक मिटा दिए जा रहे हैं। पार्टी कार्यालय से लेकर मिशन कंपाउंड तक पोस्टर फाड़े जाना और नेम प्लेट हटना यह सवाल खड़ा कर रहा है

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बरेली। एक तरफ समाजवादी पार्टी मिशन 2027 को लेकर सत्ता पक्ष पर हमलावर है। सरकार बनाने के ख्वाब देख रही है, तो दूसरी तरफ संगठन के भीतर इतना ज़हर भरा है कि जिलाध्यक्ष का पद छूटते ही उनके नाम-निशान तक मिटा दिए जा रहे हैं। पार्टी कार्यालय से लेकर मिशन कंपाउंड तक पोस्टर फाड़े जाना और नेम प्लेट हटना यह सवाल खड़ा कर रहा है कि जब संगठन भीतर से ही बिखरा हो, तो जनता को क्या संदेश जाएगा?

कमेटी भंग होते ही शुरू हुई पोस्टर जंग

समाजवादी पार्टी के स्थानीय संगठन में रार थमने का नाम नहीं ले रही है। लंबे समय से चले आ रहे अंदरूनी द्वंद के बाद जिला कमेटी को मय जिलाध्यक्ष भंग कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद गुटबाजी और तेज हो गई। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि निवर्तमान जिलाध्यक्ष शिवचरन कश्यप के नाम वाले पोस्टर फाड़ दिए गए और उनकी नेम प्लेट तक हटा दी गई।

मिशन कंपाउंड गेट से लेकर पार्टी कार्यालय तक नामो-निशान मिटाया

मिशन कंपाउंड स्थित पार्टी कार्यालय को जाने वाले मार्ग पर लगे संकेतक से शिवचरन कश्यप के नाम का पोस्टर फाड़ दिया गया। इतना ही नहीं, लोहिया भवन स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय पर उनके फोटो वाला बैनर हटाकर डिंपल यादव का फोटो लगा बैनर टांग दिया गया। जिलाध्यक्ष कक्ष के बाहर लगी नेम प्लेट भी हटा दी गई। कार्यालय और आसपास के क्षेत्र से उनके नाम को पूरी तरह हटाने की कोशिश की गई।

शशांक यादव के सामने खुली संगठन की कलह

सपा के स्थानीय पदाधिकारियों में लंबे समय से मतभेद चल रहे थे। नगर निगम कार्यकारिणी के चुनाव से लेकर एसआईआर और बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) प्रशिक्षण शिविर तक गुटबाजी साफ नजर आई।
बीएलए शिविरों में कम कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने संगठन की हकीकत उजागर कर दी थी। एसआईआर कार्यों में लापरवाही के चलते पहले प्रभारी को हटाया गया और लखीमपुर के पूर्व जिलाध्यक्ष शशांक यादव को बरेली का प्रभारी बनाया गया। उनके सामने भी संगठन की अंदरूनी कलह खुलकर आ गई।

अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद भी नहीं थमी गुटबाजी

प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने हालात को देखते हुए जिला कमेटी को मय जिलाध्यक्ष भंग कर दिया, लेकिन इतनी बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के बावजूद गुटबाजी समाप्त होती नहीं दिख रही। नई कमेटी अब तक गठित नहीं हुई है, जबकि निवर्तमान जिलाध्यक्ष शिवचरन कश्यप को लेकर विरोधी खेमा लगातार सक्रिय बना हुआ है।

मिशन 2027 पर सवाल: संगठन बंटा, संदेश टूटा

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब संगठन के भीतर कार्यकर्ता और पदाधिकारी एक-दूसरे को स्वीकार नहीं कर पा रहे, पोस्टर फाड़ने तक की नौबत आ रही है, तो ऐसे में समाजवादी पार्टी जनता के बीच एकजुटता और भरोसे का संदेश कैसे दे पाएगी।
मिशन 2027 को लेकर आक्रामक बयानबाजी और बड़े दावे अपनी जगह हैं, लेकिन बरेली में संगठन की यह हालत कहीं न कहीं सपा के चुनावी ख्वाब को कमजोर करती नजर आ रही है।

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