
बशीर बद्र को भावभीनी श्रद्धांजलि फोटो सोर्स - पत्रिका
Bareilly News: उर्दू अदब की दुनिया गुरुवार को उस वक्त गम में डूब गई, जब मोहब्बत, तहजीब और इंसानी जज्बातों को अल्फाज देने वाले मशहूर शायर बशीर बद्र इस दुनिया को अलविदा कह गए। उनके इंतकाल की खबर ने न सिर्फ देशभर के साहित्य प्रेमियों को झकझोर दिया, बल्कि बरेली और बदायूं की अदबी फिजाओं को भी मायूस कर दिया। मुशायरों की महफिलों का वह चमकता सितारा अब यादों में बस गया है।
बशीर बद्र के निधन पर मशहूर शायर वसीम बरेलवी बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, "मुशायरों की दुनिया का एक बहुत बड़ा सितारा आज डूब गया। बशीर बद्र सिर्फ शायर नहीं थे, बल्कि मोहब्बत, तहजीब और इंसानी एहसास की आवाज थे। उनकी शायरी आने वाली नस्लों तक दिलों को रोशन करती रहेगी।
वसीम बरेलवी ने याद किया कि वर्ष 1969 में उनके निमंत्रण पर बशीर बद्र पहली बार बरेली आए थे। इसके बाद दो दशक से अधिक समय तक उनका शहर आना-जाना लगा रहा। बरेली क्लब, बरेली कॉलेज और शहर के कई प्रतिष्ठित मुशायरों में उन्होंने अपनी शायरी से ऐसा जादू बिखेरा कि लोग देर रात तक सिर्फ उन्हें सुनने के लिए ठहरे रहते थे। वसीम बरेलवी के अनुसार बशीर बद्र की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने बदलते समाज, रिश्तों की टूटन, मोहब्बत की नजाकत और इंसानी दर्द को बेहद आसान भाषा में बयां किया। उनकी गजलों में आधुनिक दौर की बेचैनी भी थी और पुराने दौर की तहजीब भी।
बशीर बद्र का रिश्ता सिर्फ बरेली तक सीमित नहीं था। पड़ोसी जनपद बदायूं से भी उनका गहरा जुड़ाव रहा। बदायूं क्लब के सचिव और साहित्यकार डॉ. अक्षत अशेष ने बताया कि उनके पिता और प्रसिद्ध कवि डॉ. उर्मिलेश शंखधार के निमंत्रण पर बशीर बद्र वर्ष 2002, 2003 और 2005 में आयोजित बदायूं महोत्सव में शामिल हुए थे। उनकी मौजूदगी किसी उत्सव से कम नहीं होती थी। जब उन्होंने अपना मशहूर शेर "लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में" पढ़ा तो पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा था। बदायूं महोत्सव में उन्हें 'फानी शकील अवार्ड' से भी सम्मानित किया गया था।
वसीम बरेलवी ने रायपुर के एक मुशायरे की आखिरी मुलाकात को याद करते हुए बताया कि तब बशीर बद्र की तबीयत काफी कमजोर हो चुकी थी, लेकिन चाहने वालों की मोहब्बत उन्हें मंच तक खींच लाती थी। वापसी के दौरान ट्रेन में अचानक वह दरवाजे तक पहुंच गए थे, तब उन्हें संभालना पड़ा। वह दृश्य आज भी उनकी आंखों में ताजा है।
Published on:
29 May 2026 12:46 pm
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