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नवरात्रि 2020: जानिए घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

विक्रम संवत्सर 2077 में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 25 मार्च,बुधवार को सूर्योदय व्यापिनी है।इस दिन प्रतिपदा सांय 5:27 बजे तक रहेगी एवं ब्रह्म योग अपराह्न 3:36 बजे तक रहेगा जोकि शुभ योग है।

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नवरात्रि 2020: जानिए घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

नवरात्रि 2020: जानिए घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

बरेली। चैत्र नवरात्र 25 मार्च से आरम्भ हो कर 2 अप्रैल को समाप्त होंगे। इस बार नवरात्र विशेष शुभ है क्योकि ब्रह्म योग में घट स्थापना का शुभ मुहूर्त है। इसके साथ ही इस बार नवरात्र में कोई तिथि क्षय नहीं है और न ही वृद्धि है। इतना ही नहीं इस दौरान रहने वाला रेवती नक्षत्र शुभ फल देने वाला है और पंचक पांच गुना ज्यादा फल देने वाला है। बालाजी ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा के अनुसार इस बार माता रानी का आगमन नौका पर होगा जिसके कारण सिद्धि की प्राप्ति होगी लेकिन वर्षा कम होगी और माता रानी का गमन झूले पर है।

घट स्थापना मुहूर्त
विक्रम संवत्सर 2077 में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 25 मार्च,बुधवार को सूर्योदय व्यापिनी है।इस दिन प्रतिपदा सांय 5:27 बजे तक रहेगी एवं ब्रह्म योग अपराह्न 3:36 बजे तक रहेगा जोकि शुभ योग है।इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन रेवती नक्षत्र(शुभ फल देने वाला) भी होने के कारण घट स्थापना सूर्योदय के पश्चात शुभ के चौघड़िया एवं अभिजीत मुहूर्त में करना श्रेष्ठ होगा।घट स्थापना का श्रेष्ठ समय सूर्योदय एवं अभिजीत काल माना जाता है।चैत्र शुक्ल प्रतिपदा "सम्मुखी" शुभ होती है,अतः उसे ही ग्राह्म करनी चाहिए। "अमायुक्त" प्रतिपदा में पूजन नहीं करना चाहिए।
1. प्रातः काल: 6:25 से 9:28 बजे तक (लाभ,अमृत के चौघड़िया में)
2. पूर्वाह्न 11:05 से अपराह्न 12:44 बजे तक (शुभ के चौघड़िया में)
3. अपराह्न 12:20 से 1:38 बजे तक (अभिजीत मुहूर्त में)
4. सर्वोत्तम शुभ मुहूर्त:- समय--अपराह्न 12:20 से 12:44 बजे तक शुभ एवं अभिजित मुहूर्त में

कलश स्थापना/पूजा विधि
पूजन सामग्री: चावल, सुपारी,रोली,मौली,जौ,सुगंधित पुष्प,केसर,सिंदूर,लौंग,इलायची,पान,सिंगार सामग्री, दूध- दही,गंगाजल,शहद,शक्कर,शुद्ध घी, वस्त्र,आभूषण, विल्बपत्र, जनेऊ,मिट्टी का कलश,मिट्टी का पात्र,दूर्वा,इत्र, चंदन,चौकी,लाल वस्त्र,धूप-दीप,फूल,नैवेद्य, अबीर,गुलाल,स्वच्छ मिट्टी,थाली,कटोरी,जल,ताम्र कलश,रुई,नारियल आदि।
पूजन विधि
घट-स्थापना के लिए पवित्र मिट्टी से वेदी का निर्माण करें फिर उसमें जौ या गेहूं बोयें तथा उस पर यथा शक्ति मिट्टी,तांबे,चांदी या सोने का कलश स्थापित करें। उपरोक्त्त सामग्री एकत्रित कर प्रथम माँ दुर्गा का चित्र स्थापित करें एवं पूर्वमुखी होकर माँ दुर्गा की चौकी पर लाल वस्त्र बिछायें। माँ दुर्गा के बायीं ओर सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर चावल के नौ कोष्ठक,नवग्रह एवं लाल वस्त्र पर गेहूं के सोलह कोष्ठक षोडशमातृ के बनाएं। एक मिट्टी के कलश पर स्वास्तिक बनाकर उसके गले मे मौली बांधकर उसके नींचे गेहूं या चावल डाल कर रखें और उसके बाद उस पर नारियल भी रखें। नारियल पर मौली भी बांधे,उसके बाद तेल का दीपक एवं शुद्ध घी का दीपक प्रज्ज्वलित करें एवं मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर हल्का सा गीला कर उसमें जौ के दाने डालें,उसे चौकी के बाई तरफ कलश के पास स्थापित करें।अब सर्व प्रथम अपने बाएं हाथ में जल लेकर दायें हाथ से स्वयं को पवित्र करें और बार-बार प्रणाम करें।उसके बाद दीपक जलाएं एवं दुर्गा पूजा का संकल्प लेकर पूजा आरम्भ करें।

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