बरेली

नगर निगम: करोड़ों की नई बिल्डिंग बनी मुसीबत, लापरवाही पर वीके कंस्ट्रक्शन फर्म को अंतिम नोटिस, निगम की छवि धूमिल करने का आरोप

करोड़ों की लागत से बनी नगर निगम की नई बिल्डिंग अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुई और इसमें खामियों की झड़ी लग गई है। गाजियाबाद की वीके कंस्ट्रक्शन कंपनी की धीमी रफ्तार, खराब क्वालिटी और बार-बार लापरवाही से परेशान नगर निगम ने अब फर्म को अंतिम नोटिस थमा दिया है। फर्म को साफ शब्दों में कहा गया है कि अब सुधार का यह आखिरी मौका है, वरना सीधी कार्रवाई होगी।

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May 31, 2025
गाजियाबाद की वीके कंस्ट्रक्शन फर्म की लापरवाही उजागर (फोटो सोर्स: पत्रिका)

बरेली। करोड़ों की लागत से बनी नगर निगम की नई बिल्डिंग अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुई और इसमें खामियों की झड़ी लग गई है। गाजियाबाद की वीके कंस्ट्रक्शन कंपनी की धीमी रफ्तार, खराब क्वालिटी और बार-बार लापरवाही से परेशान नगर निगम ने अब फर्म को अंतिम नोटिस थमा दिया है। फर्म को साफ शब्दों में कहा गया है कि अब सुधार का यह आखिरी मौका है, वरना सीधी कार्रवाई होगी।

वीके कंस्ट्रक्शन को यह प्रोजेक्ट 2021 में मिला था और 2023 तक काम पूरा करना था। लेकिन दो साल बाद भी न तो बिल्डिंग पूरी हुई और न ही मौजूद सुविधाएं ठीक से काम कर रही हैं। कभी टैक्स विभाग की छत से पानी टपकता है, कभी एसी फेल हो जाता है, और अब तो लिफ्ट भी बंद होकर लोगों को फंसा रही है।

सर्वे में खुली पोल, जगह-जगह खामियां

23 मई को इंजीनियरों की टीम ने साइट का निरीक्षण किया। इस दौरान रिपोर्ट में सामने आया कि लिफ्ट बार-बार फंस रही है। तीनों मंजिलों पर टॉयलेट में पानी की टंकी नहीं है, यूरिनल के पार्टीशन टूटे पड़े हैं। फॉल सीलिंग और एसी सिस्टम में गड़बड़ है और फिटिंग और इक्यूपमेंट सही से काम नहीं कर रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब इस फर्म की लापरवाही सामने आई हो। पिछले साल भी नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य के निरीक्षण में घटिया काम मिला था। तब ऑडिटोरियम के स्टेज पर खराब निर्माण को लेकर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। तीसरी मंजिल पर गंदगी मिली थी, जिस पर 5 हजार का जुर्माना हुआ था।

अंतिम नोटिस में क्या कहा गया?

एक्सईएन राजीव कुमार राठी की ओर से भेजे गए नोटिस में साफ लिखा गया है कि मुख्य कार्यालय में प्लंबिंग सहित अन्य जरूरी कामों में लापरवाही की गई है। यह फर्म की मनमानी और अनुबंध के उल्लंघन का मामला है। जिससे नगर निगम की छवि धूमिल हो रही है। अगर तय समय में खामियां दूर नहीं की गईं, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जिम्मेदारी पूरी तरह फर्म की होगी।

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