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खेतों में ज़हर, मिट्टी में मौत, धान-गेहूं नहीं, उग रही है तबाही, नाइट्रोजन खत्म, उखड़ रहीं सांसें, तो क्या बंजर हो जाएगी ज़मीन

पेस्टिसाइड और फ़र्टिलाइज़र के अंधाधुंध प्रयोग ने मंडल की खेती को खतरे के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। ब्लाक स्तर पर कराए गए मृदा परीक्षण में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। चारों जिलों में खेतों से नाइट्रोजन और कार्बनिक जीवांश तेजी से गायब हो रहे हैं।

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बरेली। पेस्टिसाइड और फ़र्टिलाइज़र के अंधाधुंध प्रयोग ने मंडल की खेती को खतरे के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। ब्लाक स्तर पर कराए गए मृदा परीक्षण में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। चारों जिलों में खेतों से नाइट्रोजन और कार्बनिक जीवांश तेजी से गायब हो रहे हैं। हालात ऐसे रहे और किसान अब भी नहीं चेते तो उपजाऊ धरती धीरे-धीरे बंजर में तब्दील हो जाएगी और आने वाले समय में अन्न संकट से इनकार नहीं किया जा सकता।

बरेली: 21 हजार नमूने, लगभग सभी में नाइट्रोजन गायब

चार महीने पहले चले विशेष अभियान में बरेली जिले के 21,000 किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लिए गए। जांच में 20,932 नमूनों में नाइट्रोजन की मात्रा बेहद कम पाई गई। केवल 20 नमूनों में सामान्य से अधिक और महज 13 में सामान्य स्थिति मिली। कार्बनिक जीवांश भी संकट में हैं—19,381 नमूनों में कमी, 1,504 में मध्यम और सिर्फ 98 में पर्याप्त मात्रा दर्ज हुई। हालांकि कापर, सल्फर, बोरान, मैगनीज और जिंक की स्थिति फिलहाल सामान्य बताई गई है।

बदायूं: हर खेत में खतरे की घंटी

बदायूं जिले में जांचे गए 21,000 मृदा नमूनों में नाइट्रोजन लगभग नगण्य पाई गई। कार्बनिक जीवांश की स्थिति और ज्यादा डराने वाली है—19,766 नमूनों में बेहद कम, 1,228 में सामान्य और सिर्फ छह नमूनों में ही पर्याप्त मात्रा मिली।
आयरन 13,938 नमूनों में पर्याप्त रहा, लेकिन 7,062 में इसकी कमी दर्ज की गई। बाकी सूक्ष्म पोषक तत्व फिलहाल संतोषजनक बताए गए हैं।

पीलीभीत: हजारों नमूनों में उपज का दम टूट रहा

पीलीभीत में 9,793 नमूनों की जांच हुई, जिनमें 9,788 में नाइट्रोजन बेहद कम मिली। सिर्फ तीन नमूनों में मध्यम और दो में ही पर्याप्त मात्रा पाई गई। कार्बनिक जीवांश 7,755 नमूनों में कम, 1,854 में सामान्य और केवल 174 में भरपूर मिले। अन्य सूक्ष्म तत्व फिलहाल संतुलन में हैं।

शाहजहांपुर: उपजाऊ जमीन पर सबसे बड़ा वार

शाहजहांपुर जिले में 20,998 नमूनों की जांच में 20,994 में नाइट्रोजन बहुत कम पाई गई। सिर्फ एक नमूना सामान्य और तीन में ही प्रचूर मात्रा मिली। कार्बनिक जीवांश 20,400 नमूनों में कम, 587 में सामान्य और सिर्फ आठ में पर्याप्त दर्ज हुए। अन्य तत्वों की स्थिति सामान्य बताई गई है।

किसानों के लिए साफ चेतावनी: तकनीक बदली नहीं तो बंजर तय

संयुक्त कृषि निदेशक दुर्विजय सिंह ने माना कि खेतों की उर्वरा शक्ति में गिरावट गंभीर चिंता का विषय है। इससे खेती की लागत बढ़ रही है और किसान रासायनिक खाद पर और निर्भर हो रहे हैं। उन्होंने किसानों को चेताया कि फसल चक्र अपनाना अब विकल्प नहीं, मजबूरी है। ढैंचा और सनई जैसी हरी खाद उगाकर खेत में जोताई करने, गोबर की खाद का अधिक से अधिक उपयोग करने और मृदा परीक्षण कार्ड के आधार पर ही उर्वरक डालने की सलाह दी गई है।


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