
एसडीएम इशिता किशोर ने अफसरों के साथ किया निरीक्षण (फोटो सोर्स: पत्रिका)
बरेली। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश और डैम से पानी छोड़े जाने के कारण रामगंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। सोमवार को पानी का बहाव इतना तेज हुआ कि खादर क्षेत्र के हजारों बीघा खेत जलमग्न हो गए। धान, तिल, उड़द और गन्ने की फसलें बर्बादी के कगार पर पहुंच गई हैं, जिससे किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा मंडरा रहा है।
मीरगंज तहसील के गोरा लोकनाथपुर गांव में रामगंगा घाट पुल का एप्रोच मार्ग तेज बहाव में कट गया, जिससे मीरगंज-आंवला का सीधा संपर्क टूट गया। वहीं, मीरगंज से सिरौली जाने वाले मार्ग पर कैलाश गिरी बाबा मढ़ी रामगंगा घाट पुल का एप्रोच भी बह गया, जिससे यातायात प्रभावित हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि आसपास के सभी खेत बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं।
तहसीलदार आशीष कुमार सिंह ने बताया कि जलस्तर बढ़ने और मार्ग कटने के बाद मीरगंज-सिरौली और गोरा लोकनाथपुर-गुलड़िया मार्ग को दीवार बनाकर बंद कर दिया गया है, ताकि लोग खतरे में न पड़ें। सोमवार को एसडीएम इशिता किशोर, तहसीलदार और मीरगंज थाना अध्यक्ष ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया और लोगों से बाढ़ के पानी के पास न जाने की अपील की। प्रशासन ने हालात पर लगातार निगरानी रखने की बात कही है।
विकासखंड मीरगंज के कपूरपुर गांव में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गोशाला में बाढ़ का पानी भरने से कई गायों की मौत हो गई। ग्रामीण पिंटू सिंह, राहुल सिंह, पप्पू सिंह, राकेश सिंह समेत कई लोगों ने एसडीएम से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि जब ग्राम प्रधान से गायों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने को कहा गया तो गाली-गलौज की गई। एसडीएम इशिता किशोर ने बताया कि गोशाला में पानी भर गया था, लेकिन सभी गायों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। मौत के आरोपों की जांच कराई जाएगी।
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Updated on:
11 Aug 2025, 8:21 PM IST
Published on:
11 Aug 2025, 8:21 PM IST
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