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शाहजहांपुर में प्रतिमाएं तोड़ने पर उबाल, चौथे दिन भी सियासी घमासान, दूध-गंगाजल से अभिषेक कर निकाला मशाल जुलूस

स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों की प्रतिमाएं तोड़े जाने के मामले ने जिले की सियासत को गर्मा दिया है। बुलडोजर कार्रवाई के बाद पुनः स्थापित प्रतिमाओं को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध का बिगुल फूंक दिया।

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शाहजहांपुर। स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों की प्रतिमाएं तोड़े जाने के मामले ने जिले की सियासत को गर्मा दिया है। बुलडोजर कार्रवाई के बाद पुनः स्थापित प्रतिमाओं को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध का बिगुल फूंक दिया। शुक्रवार को कार्यकर्ताओं ने शहीदों की प्रतिमाओं का दूध और गंगाजल से अभिषेक किया और शहर में मशाल जुलूस निकालकर अपना आक्रोश जताया।

नगर निगम कार्यालय के बाहर सड़क किनारे स्थापित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और ठाकुर रोशन सिंह की प्रतिमाएं लंबे समय से सम्मान का केंद्र थीं। आरोप है कि रविवार रात इन्हें बुलडोजर से गिरा दिया गया और मलबे को कूड़ा वाहन में भरकर फेंक दिया गया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और राजनीतिक दलों में जबरदस्त नाराजगी फैल गई। कांग्रेस जिलाध्यक्ष रजनीश गुप्ता के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने गुरुवार रात शहर में मशाल जुलूस निकाला। इसके बाद पुनः स्थापित प्रतिमाओं के पास पहुंचकर दूध और गंगाजल से उनका अभिषेक किया गया। गुप्ता ने कहा कि शहीदों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए शहीद पूजनीय हैं।

खंडित प्रतिमाओं पर फिर छिड़ा विवाद

प्रतिमाओं के पुनः स्थापित होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। लोगों का कहना है कि पहले वायरल वीडियो में प्रतिमाओं के सिर और धड़ टूटे हुए नजर आ रहे थे, ऐसे में वही प्रतिमाएं दोबारा कैसे स्थापित कर दी गईं। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि धार्मिक मान्यता के अनुसार खंडित मूर्तियों की पूजा नहीं की जाती, उन्हें गंगा में प्रवाहित या विधि अनुसार विसर्जित किया जाना चाहिए। वहीं समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष तनवीर खान ने आरोप लगाया कि प्रतिमाओं को इसलिए तोड़ा गया क्योंकि उनके कार्यकाल में सौंदर्यीकरण कराया गया था और शिलापट्ट पर उनका नाम दर्ज था। इसे हटाने के लिए ही यह पूरी कार्रवाई की गई।

सीएम के निर्देश पर कार्रवाई, अफसर निलंबित

मामले ने तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया। उनके निर्देश पर एक कनिष्ठ अभियंता और एक सहायक अभियंता को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही कार्यदायी संस्था के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। घटना के विरोध में विभिन्न राजनीतिक दलों का प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। शहर में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।

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