
बरेली। ‘गोलमाल’ और ‘थ्री इडियट्स’ से देशभर में पहचान बना चुके बॉलीवुड अभिनेता शरमन जोशी ने बरेली नाट्य महोत्सव में नाटक ‘दिल्लगी’ के मंचन के साथ दर्शकों को पेट पकड़कर हंसने पर मजबूर कर दिया। होटल में मीडिया से बातचीत में उन्होंने बेबाक कहा कि फिल्में ज़रूरी हैं, लेकिन थिएटर में काम करने से जो तसल्ली मिलती है, वह कहीं और नहीं क्योंकि यहां कलाकार को दर्शक की तात्कालिक प्रतिक्रिया मिलती है।
शरमन जोशी ने कहा कि थिएटर कलाकार को दर्शकों के सबसे करीब रखता है। यहीं अभिनय की असली परीक्षा होती है, जहां हर हंसी, हर तालियों की गूंज कलाकार की मेहनत का तुरंत इनाम बनती है। उन्होंने फिल्मों के कम चलने की वजह बढ़ते साधनों और बदलते दर्शक व्यवहार को बताया।
ड्रामा ड्रॉपआउट्स की ओर से प्रस्तुत ‘दिल्लगी’ चुलबुले दृश्य, शरारतों और गलतफहमियों की कॉमेडी है। नाटक के केंद्र में महाशय चक्रधर—आडंबरकारी मगर भोले पंडित—जिन्हें एकतरफा प्रेम में फंसाकर साथी शरारतों की ऐसी चकरी में डालते हैं कि ठहाके रुकते नहीं। फर्जी प्रेमपत्र, छेड़छाड़, हंगामा और दिल्लगी—हर दृश्य दर्शकों को हंसी से लोटपोट करता है।
नाटक का निर्देशन लव तोमर ने किया। मंच पर विजय कुमार सिंह, पंकज कुमार मौर्य, शुभा भट्ट, स्पर्श पटेल, अभिषेक, अमन गुप्ता, सिद्धि रस्तोगी, मुनीश रत्न, हिमांशु गंगवार सहित कलाकारों ने सशक्त प्रस्तुति दी। आयोजन में विनोद पागरानी, बंटी खान, उद्यमी तनुज भसीन, संदीप झावर, नितिन मोदी, अमन समेत रंगमंच प्रेमी मौजूद रहे।
शरमन ने बताया कि थिएटर का शौक उन्हें बचपन से है। पिता अरुण जोशी और चाचा प्रवीण जोशी भी रंगमंच से जुड़े रहे हैं। गुजरात से शुरू हुए इस सफर में वे अब तक 120 से अधिक शो कर चुके हैं। फिलहाल बरेली में वे नाटक ‘राजू राजा राम और मैं’ का मंचन करने आए हैं।
बरेली पर बात छिड़ते ही अभिनेता मुस्कुराए “झुमके बहुत सुने हैं, अब बर्फी की भी खूब चर्चा है। दूसरी बार आया हूं, घूम नहीं पाया… इस बार दो दिन रुकूंगा तो शहर देखने जरूर निकलूंगा।”आगे क्या
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Published on:
17 Jan 2026 10:39 am
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