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चालान का खेल खत्म, कोर्ट चले जाओ वाला फार्मूला फेल, गलती पर ड्राइविंग लाइसेंस होगा सस्पेंड, करना होगा ये

बरेली। यातायात नियमों का उल्लंघन करने के बाद परिवहन विभाग में चालान जमा कराने के बजाय सीधे अदालत का रुख करने वाले वाहन स्वामियों के लिए अब राहत नहीं है। चालान नियमों में बड़े बदलाव कर दिए गए हैं। नए नियमों के तहत यदि किसी वाहन का एक वर्ष में पांच बार चालान होता है तो चालक का ड्राइविंग लाइसेंस तीन माह के लिए निलंबित कर दिया जाएगा।

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बरेली। यातायात नियमों का उल्लंघन करने के बाद परिवहन विभाग में चालान जमा कराने के बजाय सीधे अदालत का रुख करने वाले वाहन स्वामियों के लिए अब राहत नहीं है। चालान नियमों में बड़े बदलाव कर दिए गए हैं। नए नियमों के तहत यदि किसी वाहन का एक वर्ष में पांच बार चालान होता है तो चालक का ड्राइविंग लाइसेंस तीन माह के लिए निलंबित कर दिया जाएगा।

नए प्रावधानों के अनुसार यातायात नियमों के उल्लंघन पर काटे गए चालान अब सीधे आरटीओ कार्यालय में ही जमा करने होंगे। चालान जमा करने के लिए वाहन स्वामियों को दो विकल्प दिए जाएंगे, लेकिन कोर्ट जाने से पहले नियमों का पालन अनिवार्य होगा।

कोर्ट जाने से पहले देना होगा 50 प्रतिशत जुर्माना

परिवहन विभाग की कार्रवाई से असंतुष्ट वाहन स्वामी अब सीधे अदालत में चालान को चुनौती नहीं दे सकेंगे। इसके लिए पहले चालान की 50 प्रतिशत धनराशि जमा करनी होगी, उसके बाद ही प्रवर्तन कार्रवाई को कोर्ट में चैलेंज किया जा सकेगा। प्रदेश में पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा हर साल हजारों की संख्या में चालान किए जाते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में वाहन चालक इन्हें जमा नहीं करते। हालात यह हो गए कि चालान महीनों नहीं, बल्कि वर्षों तक लंबित पड़े रहते हैं। लंबित चालानों की संख्या लाखों में पहुंचने पर मार्च 2023 में प्रदेश सरकार को 2021 से पहले के केवल जुर्माने से दंडनीय मामलों को समाप्त करने का फैसला लेना पड़ा था।

10 हजार वाहनों पर 50 से अधिक चालान

हाल ही में पुलिस ने परिवहन विभाग को करीब 10 हजार ऐसे वाहनों की सूची भेजी थी, जिन पर 50 से अधिक चालान हो चुके हैं। इनमें से एक हजार से ज्यादा वाहन ऐसे हैं, जिन पर 100 से अधिक चालान लंबित हैं। इसी तरह की शिकायतें अन्य जिलों से भी शासन तक पहुंची थीं। नए नियमों के अनुसार चालान होने के बाद उसे जमा करने के लिए 45 दिन का समय मिलेगा। यदि वाहन स्वामी को कोई आपत्ति है तो इसी अवधि में संभागीय परिवहन अधिकारी के समक्ष आवेदन करना होगा। तय समय सीमा में आवेदन न करने पर बाद में किसी प्रकार की राहत नहीं मिलेगी।

30 दिन में निस्तारण, नहीं तो चालान स्वतः निरस्त

आवेदन मिलने के बाद अपील अधिकारी यानी आरटीओ को 30 दिन के भीतर उसका निस्तारण करना अनिवार्य होगा। अधिकारी या तो चालान में संशोधन करेंगे या उसे यथावत रखने का आदेश देंगे। यदि निर्धारित अवधि में निस्तारण नहीं होता है तो चालान स्वतः निरस्त माना जाएगा। यात्री-माल कर अधिकारी एवं उत्तर प्रदेश ट्रांसपोर्ट ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव रमेश चंद्र प्रजापति ने बताया कि चालान नियमों में बदलाव के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इससे प्रवर्तन कार्रवाई अधिक प्रभावी होगी, सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और राजस्व में भी वृद्धि होगी।

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