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बरेली

करोड़ों के पुल और रोड बनाने वाली कंपनी दो साल के लिए डिबार, ठेकेदार को नोटिस जारी

बदायूं के ठेकेदार सतीश चंद्र दीक्षित की करोड़ों के पुल और रोड बनाने वाली कंपनी को दो साल के लिए डिबार कर दिया गया। उसके पास पुल बनाने का अनुभव ही नहीं था। फर्म को पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन अधिकारियों ने सिर्फ सड़क निर्माण का ही अनुभव होने के बाद भी पुल निर्माण में ए क्लास का रजिस्ट्रेशन कर बदायूं की अरिल नदी पर पुल बनाने का ठेका दे दिया था।

बरेलीJun 24, 2024 / 01:18 pm

Avanish Pandey

बरेली। बदायूं के ठेकेदार सतीश चंद्र दीक्षित की करोड़ों के पुल और रोड बनाने वाली कंपनी को दो साल के लिए डिबार कर दिया गया। उसके पास पुल बनाने का अनुभव ही नहीं था। फर्म को पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन अधिकारियों ने सिर्फ सड़क निर्माण का ही अनुभव होने के बाद भी पुल निर्माण में ए क्लास का रजिस्ट्रेशन कर बदायूं की अरिल नदी पर पुल बनाने का ठेका दे दिया था। प्रमुख अभियंता कार्यालय ने आदेश दिया है कि फर्म को किसी भी निविदा प्रक्रिया में शामिल न किया जाए। फर्म के रजिस्ट्रेशन के समय अनुभव प्रमाण पत्रों का संज्ञान न लेने पर तत्कालीन मुख्य अभियंता को भी दोषी माना गया है।
नोटिस देकर आरोपों पर मांगा गया जवाब
इस फर्म ने पीलीभीत में भी कई पुलों की टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। अनुभव न होने की के कारण से ही अरिल नदी पर जो पुल 6 महीने में बनना था, वह ढाई साल में पूरा हो पाया। पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार समेत कई लोगों ने इस फर्म को नियमविरुद्ध ढंग से ठेका देने सहित कई गंभीर आरोप लगाते हुए शासन से शिकायत की थी। इसके बाद प्रमुख अभियंता जांच शुरू कराई। इसी साल सात मई को सतीश चंद्र को नोटिस देकर आरोपों पर जवाब मांगा गया।
चीफ इंजीनियर बरेली को पत्र भेजकर मांगा विवरण
पूर्णरूप से जवाब न दिए जाने पर 24 मई को चीफ इंजीनियर बरेली को पत्र भेजकर विवरण मांगा। इसके बाद 10 जुलाई 2024 को मुख्यालय पत्र भेजकर अवगत कराया गया
कि मुरादाबाद और लखनऊ के मुख्य अभियंता की संयुक्त जांच रिपोर्ट फरवरी में ही भेज दी गई थी। इसमें फर्म को पूरी तरह और तत्कालीन मुख्य अभियंता को पंजीकरण में गड़बड़ी पर आंशिक रूप से दोषी करार दिया गया था। इसके बाद फर्म पर दो साल के लिए रोक लगा दी गई।
तत्कालीन मुख्य अभियंता समेत आठ अफसरों को ही ठहराया गया था दोषी
ठेकेदार सतीश चंद्र का कहना है कि लोकायुक्त की जांच में उन पर लगे सभी आरोप निराधार मिले थे। तत्कालीन मुख्य अभियंता समेत आठ अफसरों को ही दोषी ठहराया गया था। इन अफसरों पर अब तक कार्रवाई न होने पर उन्हें कोर्ट का जाना पड़ा। कोर्ट ने तीन महीने में कार्रवाई करने का आदेश दिया तो अधिकारियों ने समझौता करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। समझौता न करने पर उन पर कार्रवाई की गई है। यह साजिश रचने वाले ठेकेदार और अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए वह फिर कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

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