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रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों में स्पोर्ट्स टीचर नहीं, गतिविधियां भी जीरो, कैसे बनेंगे इंटरनेशनल खिलाड़ी

बरेली। शोध में महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में खेलों को लेकर हैरान करने वाली जानकारी सामने आई है। कई कॉलेजों में शारीरिक शिक्षा और खेलों से संबंधित शिक्षक तक नहीं हैं। यहां तक की विश्वविद्यालय में भी खेलों की हालत काफी दयनीय है। ऐसे में खिलाड़ी इंटरनेशनल खिलाड़ी कैसे बनेंगे।

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इनके मार्गदर्शन में किया शोध

एसआरएमएस मेडिकल कालेज में खेल अधिकारी व पूर्व बास्केटबाल खिलाड़ी डॉ. नितिन सक्सेना ने ओपीजेएस यूनिवर्सिटी, चुरु (राजस्थान) में फिजिकल एजूकेशन एंड स्पोर्ट्स विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार और हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी मथुरा के खेल निदेशक राजेश कुमार कहरवार के मार्गदर्शन में शोध किया।

100 कालेजों ने किया रिस्पांस, 80 ने सहयोग

रिसर्च के लिए डॉ. नितिन ने रुहेलखंड विवि से संबद्ध 125 कॉलेजों से जानकारी मांगी, जिसमें 100 कालेजों ने रिस्पांस दिया, जबकि 80 ने शोध में सहयोग किया। डॉ. नितिन के अनुसार शोध के दौरान उन्हें खेल सुविधाओं को लेकर चौंकाने वाली जानकारी मिलीं। इसके मुताबिक संबद्ध कॉलेजों के साथ विश्वविद्यालयों में भी खेलों की हालत काफी दयनीय है।

बास्केट बॉल और बैडमिटन के लिए सीमेंटेड तक नहीं

डॉ. नितिन ने अपने शोध में पाया कि महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध 568 कॉलेजों में अधिकतर में मिट्टी और घास के मैदान पर सभी तरह के खेल और प्रतियोगिताएं होती है। कॉलेजों में शारीरिक शिक्षा और खेल विभाग से संबंधित शिक्षक तक नहीं हैं। कुछ कालेजों में ही बास्केट बॉल और बैडमिटन जैसे खेलों के लिए सीमेंटेड कोर्ट है। कुश्ती के लिए पर्याप्त सुविधाएं और रेसलिंग के गद्दे भी कुछ ही कालेजों में है। ज्यादातर कालेजों में खेल मैदान बाउंड्रीवाल से कवर्ड नहीं।

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