
बरेली। तहसील न्यायालय में फाइलों के खेल ने प्रशासन को हिला दिया है। बिना एसडीएम के हस्ताक्षर के ही आदेश जारी होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जैसे ही यह गड़बड़ी जिलाधिकारी अविनाश कुमार सिंह के संज्ञान में आई, उन्होंने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत तुरंत कार्रवाई करते हुए एसडीएम न्यायिक के पेशकार मोतीराम को निलंबित कर दिया। साथ ही एसडीएम न्यायिक पर भी जांच बैठा दी गई है।
मामला धारा 80 की फाइलों से जुड़ा है, जहां पेशकार ने गुपचुप तरीके से फाइलें प्रस्तुत कर आदेश जारी करा दिए। चौंकाने वाली बात यह रही कि इन फाइलों पर एसडीएम न्यायिक के हस्ताक्षर तक नहीं थे, फिर भी आदेश प्रभावी कर दिए गए। प्रशासनिक गलियारों में इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया।
कमिश्नर बरेली भूपेंद्र एस चौधरी के प्रस्तावित दौरे से पहले पुराने आदेशों की फाइलों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान करीब चार फाइलों में हस्ताक्षर न होने का मामला पकड़ा गया। जांच में यह भी सामने आया कि एसडीएम न्यायिक ने पेशकार पर भरोसा करते हुए फाइलों को बिना गहराई से जांचे आगे बढ़ा दिया।
डीएम अविनाश कुमार सिंह ने प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए पेशकार मोतीराम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि उसकी तैनाती के दौरान एसडीएम न्यायिक और तहसीलदार कोर्ट में जितने भी आदेश हुए हैं, सभी की व्यापक जांच की जाए। इस पूरे प्रकरण में एसडीएम न्यायिक तृप्ति गुप्ता की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। डीएम ने उनके खिलाफ भी जांच शुरू करा दी है। प्रशासन का साफ कहना है कि लापरवाही या मिलीभगत, दोनों ही स्थितियों में जिम्मेदारी तय होगी।
इसी कड़ी में टेहरा गांव के लेखपाल अनिल सिंह पर भी कार्रवाई हुई है। जांच में लापरवाही और दो बार नोटिस देने के बावजूद जवाब न देने पर एसडीएम इशिता किशोर ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
Updated on:
25 Mar 2026 12:39 pm
Published on:
25 Mar 2026 12:37 pm
बड़ी खबरें
View Allबरेली
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
