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मायावती पर सीबीआई का शिकंजा, इस चीनी मिल की बिक्री बन सकती है गले की फांस

सुभाषनगर के नेकपुर में 33 एकड़ जमीन पर बनी मिल को 2010-11 में महज 14.11 करोड़ रूपए में बेच दिया गया था।  
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बरेली

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Amit Sharma

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Updated: 8 May 2018, 2:53 PM IST

mayawati

बरेली।मायावती सरकार में कौड़ियों के भाव बेची गईं 21 चीनी मिलों में बरेली की नेकपुर चीनी मिल भी शामिल है। प्रदेश सरकार ने इन चीनी मीलों की बिक्री की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की है।इस मामले में अब सीबीआई बसपा प्रमुख मायावती पर शिकंजा कस सकती है।सुभाषनगर के नेकपुर में 33 एकड़ जमीन पर बनी मिल को 2010-11 में महज 14.11 करोड़ रूपए में बेच दिया गया था। जबकि इस जगह की कीमत अरबों में है। अगर इस मामले की सीबीआई जांच हुई तो मायावती, बसपा सरकार में कद्दावर मंत्री और अफसर भी इसमें फंस सकते हैं।

अरबों की है सम्पत्ति

नेकपुर में 33 एकड़ क्षेत्रफल में फैली चीनी मिल को बसपा सरकार में नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी ने 14.11 करोड़ रूपए में खरीदा था। ये कम्पनी बाद में फर्जी पाई गई। नेकपुर चीनी मिल की जमीन की कीमत ही अरबों में है जबकि इसके अंदर का इंफ्रास्टक्चर और लाखों के पेड़ भी हैं लेकिन बसपा सरकार में सभी नियमों को ताक पर रख कर इस बंद पड़ी मिल को बेच दिया गया। यहां पर मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बननी थी लेकिन बसपा की सरकार दोबारा सत्ता में नहीं आ पाई जिसके बाद मिल को खरीदने वालों के अरमान परवान नहीं चढ़ सके और अब योगी सरकार ने इसकी सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है।


चीनी मिल का इतिहास

नेकपुर चीनी मिल 1950 में बनकर तैयार हुई और इसका नाम एचआर शुगर मिल था। 1977 में गन्ना किसानों का भुगतान न करने के कारण मिल को नीलाम कर दिया गया। कुछ साल सरकार ने मिल पर रिसीवर तैनात रखा इसके बाद राज्य चीनी निगम मिल को अधिग्रहित कर लिया और 1994 में मिल को सर्वश्रेष्ठ पेराई के लिए इनाम भी मिला। 28 फरवरी 1998 को इस मिल में अंतिम पेराई सत्र हुआ जिसके बाद ये मिल बंद हो गई जिसके बाद यहां काम करने वाले 650 कर्मचारियों को जबरन वीआरएस दे दिया गया।

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