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बरेली। स्मार्ट सिटी के चौथे राउंड में बरेली को भी जगह मिल गई है। जरी जरदोजी का प्रोजेक्ट लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के अफसरों को इस कदर भाया कि बरेली की रैंकिंग बढ़ गई और उत्तर प्रदेश में बरेली को पहला स्थान प्राप्त हुआ। स्मार्ट सिटी के लिए बरेली को केंद्र और राज्य सरकार से 1902 करोड़ रुपये मिलेंगे, जिसमें से 400 करोड़ का बजट जरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रयोग किया जाएगा।
जरी इंडिया के प्रोजेक्ट की अहम भूमिका
देश ही नहीं विदेशों में भी पहचान बना चुका बरेली का जरी जरदोजी का काम पिछले कुछ सालों से ठप हो गया है और इस उद्योग से जुड़े हजारों लोग बेरोजगार हो गए। जरी कारीगरों के उत्थान के लिए शहर के जाने माने उद्यमी हाजी शकील क़ुरैशी ने जरी इंडिया नाम की कम्पनी बनाई, जिसमें करीब तीन लाख कारीगरों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। उनका यह प्रोजेक्ट कमीश्नर और डीएम को पसंद आया। इसके बाद प्रोजेक्ट को लखनऊ भेजा गया, जहां से प्रोजेक्ट पास होकर दिल्ली गया। दिल्ली में भी इस प्रोजेक्ट को न सिर्फ हाथों हाथ लिया गया बल्कि इसने बरेली की रैकिंग भी बढ़ाई। अब बरेली को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला है।
जरी कारीगरों के बदलेंगे दिन
लम्बे समय से बदहाली से जूझ रहे जरी कारीगरों को भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से संजीवनी मिलेगी। जरी कारीगरों के उत्थान के लिए प्रशासन की सोसायटी और जरी इंडिया एक साथ मिलकर काम करेगी। अब जरी कारीगरों को उनकी मेहनत का उचित फल मिलेगा और उनको देश दुनिया के मुताबिक उत्पाद तैयार करना सिखाया जाएगा।
आठ लाख हैं जरी कारीगर
जरी इंडिया की स्थापना करने वाले हाजी शकील कुरैशी का कहना है कि बरेली में करीब आठ लाख जरी कारीगर हैं, जिनमें तीन लाख महिलाएं हैं। बरेली के स्मार्ट सिटी में शामिल होने में जरी प्रोजेक्ट का अहम रोल है। इससे जरी कारीगरों की दशा में सुधार आएगा।
Published on:
20 Jan 2018 01:48 pm
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