
पीएचई विभाग में नौकरी का सुनहरा अवसर (Photo source- Patrika)
Success Story: मदरसों के जरिए साल उर्दू की तालीम रेगिस्तान में फैलने लगी थी तो यह अंदाजा नहीं था कि रेगिस्तान के दुरूह इलाकों में अलीफ, बे,पे..सीखकर स्लेट थामने वाले कॉलेज शिक्षा हासिल ही नहीं करेंगे बल्कि कॉलेज में पढ़ाने पहुंच जाएंगे। बाड़मेर जिले के लधे का पार के दो सगे भाइयों का चयन उर्दू के असिस्टेंट प्रोफेसर में चौथी और पांचवीं रैंक में हुआ है।
शौकत और बरकत दोनों सगे भाई हैं। पिता हाकमखां सामान्य किसान थे,जो झोंपे बुनने का कार्य भी करते थे। पांच बेटे और बड़ा परिवार होने के बावजूद उन्होंने अपने बेटों की तालीम में कसर नहीं रखी। चाचा के साथ पोकरण भेज दिया जहां, वे उर्दू भी पढ़े। इसके बाद बाड़मेर कॉलेज में दाखिला लिया। शौकत बताते हैं कि कॉलेज के दिनों में उन्हें आर्थिक तंगी थी तो दोनों ही भाई बालोतरा में एक टेंट हाउस में काम करके अपनी पढ़ाई के खर्चे का इंतजाम करते थे।
उर्दू की तालीम इन दोनों भाइयों का अच्छा फैसला रही। हालांकि शौकत ने इतिहास और बरकत ने राजनीति विज्ञान में भी एमए किया लेकिन उर्दू की वजह से शौकत को 2014 में द्वितीय श्रेणी और बरकत को 2018 में तृतीय श्रेणी शिक्षक की नौकरी हासिल हो गई।
एक बार नौकरी मिलने के बावजूद ये दोनों भाई रुके नहीं। दोनों ने कॉलेज शिक्षा में तैयारी की। हाल ही में आए परिणाम में दोनों का ही चयन कॉलेज शिक्षा के असिस्टेंट प्रोफेसर में हुआ। शौकत को चौथी और बरकत को राज्य में पांचवीं रैंक मिली। शौकत को शिव और बरकत को पोकरण कॉलेज में नियुक्ति मिली है।
पढ़ाई करना बहुत जरूरी है। पढ़ाई के लिए परिस्थितियां कोई मायने नहीं रखती है। पढऩा मुश्किल नहीं है, बस मन लगाना पड़ता है। हम लोगों ने अपने परिवार में आर्थिक तंगी का पूरा दौर देखा है। आसपास में भी सैकड़ों परिवार है जो पढ़ाई से दूर रहने की वजह से आज भी कड़ी मेहनत के बावजूद गरीबी में जी रहे है। हम दोनों भाइयों का चयन उनके लिए एक मिसाल बना है। हम कोशिश करेंगे कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को पढ़ाई को प्रेरित करें।-शौकत, असिस्टेंट प्रोफेसर
Updated on:
29 Jul 2025 02:39 pm
Published on:
29 Jul 2025 01:17 pm
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