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4 साल पहले 40 करोड़ थे खजाने में, अब कंगाल हो गई नगर परिषद!

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4 years ago 40 crores of treasures,Now the city council has become poor

4 years ago 40 crores of treasures,Now the city council has become poor

26 नवम्बर 2014 को हुआ था नगर परिषद के वर्तमान बोर्ड का गठन
4 साल पहले 40 करोड़ थे खजाने में, अब कंगाल हो गई नगर परिषद!
फर्जी पट््टा प्रकरण रहा चर्चा में, आते-जाते रहे आयुक्त
भवानीसिंह राठौड़

बाड़मेर . बहुचर्चित फर्जी पट्टा प्रकरण के बाद विवादों से घिरी रही शहर की सरकार के कार्यकाल के चार साल सोमवार को पूरे हो रहे हैं। नगर परिषद के वर्तमान बोर्ड के चार साल के कार्यकाल में खजाना खाली हो गया। बोर्ड के गठन के समय करीब 40 करोड़ रुपए खजाने में थे। बढऩे की बजाय यह आंकड़ा डेढ़ करोड़ पर आ गया। वर्तमान नगर परिषद बोर्ड का गठन 26 नवंबर 2014 को हुआ था।
चार साल में आठ आयुक्त आए-गए
नगर परिषद बोर्ड गठन के दौरान धर्मपाल जाट आयुक्त थे। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद उन्हें 7 मई को एपीओ कर दिया। उसके बाद चार्ज एडीएम के पास रहा। उसके बाद 26 जून को आयुक्त पद पर जोधाराम विश्रोई को लगाया। इसके कुछ ही माह में फर्जी पट्टा प्रकरण का मामला प्रकाश में आया। फिर आयुक्त भूमिगत हो गए। लंबे समय बाद आयुक्त पद पर श्रवणकुमार विश्नोई को लगाया। फिर कमलेश मीणा, आरएएस अधिकारी गुंजन सोनी व आयुक्त पंकज मंगल को लगाया। लेकिन कुछ ही माह ही टिक पाए। वर्तमान में आयुक्त अनिल झिगोंनिया हैं।
यह प्रकरण हुआ चर्चित
बोर्ड के कार्यकाल में वर्ष 2015 में खसरा नंबर 1468 में फर्जी पट्टा प्रकरण उजागर हुआ। तत्कालीन आयुक्त ने कोतवाली में मामला दर्ज करवाया। फिर विवादित खसरे से 49 बीघा जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई। इस प्रकरण में एक दर्जन अधिकारी-कर्मचारी निलंबित हुए थे।
पट्टा न भूमि नीलामी
नगर परिषद में फर्जी पट्टा प्रकरण के बाद खौफ का साया पसरा हुआ है। वर्तमान कांग्रेस बोर्ड के चार साल के कार्यकाल में एक भी पट्टा जारी नहीं हुआ। यहां हजारों पत्रावलियां धूल फांक रहीं हैं। पिछले चार साल में कोई भी आयुक्त पट्टे जारी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। इसी तरह कॉलोनी विस्तार, दुकानों की नीलामी भी परिषद क्षेत्र में एक भी नहीं हुई।
24 की जगह महज
9 साधारण बैठक
नगर परिषद एक्ट के अनुसार 4 साल के कार्यकाल में 24 साधारण बैठक का आयोजन होना था। लेकिन महज 9 बैठकें ही हुई। बैठक में विकास की बातों पर चर्चा कम हंगामा ज्यादा हुआ।

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