
Barmer
भले ही भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में इन दिनों कड़वाहट हों। दोनों देशों के बीच तनाव हों लेकिन इस पाकिस्तानी के लिए दिल से दुआ करने का जी करता है..। यह 80 साल का इमाम है। इसकी मां जन्नत 110 साल की है।
वाघा बोर्डर से बाड़मेर तक आ गया है। आगे सीमावर्ती कोनरा गांव में अपनी मां के पास जाना है। अभी उसको वहां जाने की इजाजत नहीं मिली है और तबीयत खराब होने से बाड़मेर के अस्पताल में दाखिल हो गया है। वह बेहोश हो जाता है और कहता है मुझे मां से मिलना है...। उधर बूढी मां चल नहीं सकती और ना सुन सकती है.. इस परिस्थिति में उसको भी यहां लाना मुमकिन नहीं है।
इमाम यहां तक कह रहा है कि अब उसको पाकिस्तान नहीं जाना। वह अपनी मां के पास ही अपनी अंतिम सांस लेना चाहता है। डॉक्टर शिद्दत से लगे हुए हैं कि इमाम की हालत में जल्दी सुधार हो जाए।
इमाम सीमावर्ती देदूसर गांव में अपने ननिहाल में रहता था। 1971 की लड़ाई में वह देदूसर से पाकिस्तान में मेघे का तला छाछरो जा बसा। इसके बाद यह भारत नहीं लौट पाया। दो भाई और मां यहीं रह गए।
बरसों तक बिछुड़े मां बेटा आर्थिक कमजोरी से मिले ही नहीं। इस बार वीजा और पासपोर्ट बना तो वह अपनी 110 साल की मां से मिलने वाघा बोर्डर से 3 नवंबर को भारत आया। बाड़मेर में रहने वाला उसका भतीजा हलीम लेने गया और यहां 4 नवंबर को बाड़मेर पहुंच गए। यहां आने के बाद आगे बोर्डर तक जाने की इजाजत नहीं मिल रही थी।
हलीम बताता है कि अभी इस कोशिश में थे कि इमाम बीमार पड़ गया और उसे अस्पताल में दाखिल करना पड़ा। जब से बीमार है तब से वह एक ही रट लगा रहा है कि उसको मां से मिलना है। अब वह वापस पाकिस्तान नहीं जाना चाहता। परिवार के लोग दुआ कर रहे हैं कि उसकी तबीयत में कुछ सुधार हो जाए तो वह अपनी मां से मिल ले।
मां को अभी नहीं पता
110 साल की मां को यह कहा जा चुका है कि उसका बेटा आ गया है लेकिन वह बीमार है यह जानकारी नहीं है। मां इस इंतजार में है कि उसका बेटा आएगा और उससे मिलेगा। घर में उसके 45 साल बाद लौटने का इंतजार है।
परिवार के लोग अब मां के सामने जाने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। वे भी यही दुआ कर रहे है कि एक बार ये मां बेटा मिल ले।
जुटे हैं डॉक्टर
बाड़मेर राजकीय चिकित्सालय में दाखिल हुए इमाम को गंभीर बीमारी है। उसे लीवर की समस्या है। इस कारण दाखिल किया गया है। सात दिन से वह परेशान था। दो दिन पहले छुट्टी दी जा चुकी थी। अब वापस दाखिल किया गया है। चिकित्सक उसके उपचार का पूरा ध्यान दे रहे थे, अब जोधपुर रैफर किया गया है ताकि ये जल्द ठीक होकर अपनी मां से मिल ले।
किया रैफर
चिकित्सक के अनुसार इस बीमारी में कुछ भी कहा नहीं जा सकता, इसलिए जोधपुर रैफर किया गया ताकि जल्द एक बार यह तैयार हो जाए। लीवर में समस्या है।
Published on:
22 Nov 2016 03:21 pm
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