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अवैध अस्पताल के खिलाफ फिर शिकायतें, उपचार से पीडि़त लोग पहुंचे थाने,जानिए पूरी खबर

-एक का इंजेक्शन से हो गया गुर्दा खराब, दूसरे मरीज की तबीयत बिगड़ी -5 दिन पहले दवा पिलाने से हो गई थी मासूम की मौत

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Again complaints,illegal hospital

Again complaints against illegal hospital

रामजी का गोल फांटा. रामजी का गोल में बिना लाइसेंस के अस्पताल में उपचार से पीडि़त लोग अब थाने पहुंच रहे हैं। 5 दिन पहले ही श्रीराम हॉस्पिटल एवं जांच केंद्र के नाम से चल रहे अवैध अस्पताल में ढाई माह के मासूम की दवा पिलाने से मौत हो गई थी। इसको लेकर गुड़ामालानी थाने में मामला दर्ज होने के बाद जांच चल ही रही थी कि बुधवार को दो और पीडि़त थाने पहुंच गए। इसमें से एक 13 साल की बालिका का इसी अस्पताल में इंजेक्शन लगाने से गुर्दा खराब हो गया, जबकि दूसरे मामले में इंजेक्शन लगाने से एक बुजुर्ग महिला की तबीयत खराब हो गई तो अस्पताल संचालक ने उसे बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया। इसके बाद भी महिला को होश नहीं आया तो सांचौर रैफर किया, जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि अस्पताल संचालकों के खिलाफ शिकायतें आई है, जिसकी जांच की जा रही है।

अहमदाबाद चल रहा बालिका का इलाज
रामजी का गोल फांटा निवासी सतीराम पुत्र लिखमाराम ब्राह्मण ने गुड़ामालानी थाने में रिपोर्ट देकर बताया कि उसकी 13 वर्षीय बेटी रूपों को हल्का बुखार आया तो वह श्रीराम अस्पताल में टीकमाराम को दिखाने के लिए बच्ची को ले गया। यहां मोहनलाल ने बच्ची की जांच कर मलेरिया होने की बात कही और इंजेक्शन लगाया। इसके बाद कहा कि बालिका तीन दिन में ठीक हो जाएगी। इस पर वे घर चले गए, लेकिन दूसरे दिन बच्ची के शरीर पर सूजन आ गई। वे उसे लेकर सांचौर गए। सांचौर में भी उन्हें बड़े अस्पताल ले जाने का कहा किया। इस पर वे सिविल हॉस्पिटल अहमदाबाद में गए, जहां गुर्दे खराब होने की रिपोर्ट आई। बालिका का अभी तक अहमदाबाद के अस्पताल में उपचार चल रहा है।

इंजेक्शन लगाने से बिगड़ी तबीयत, हुई मौत
रोली निवासी रिड़मलराम पुत्र इन्दाराम ने गुड़ामालानी थाने में रिपोर्ट पेश कर बताया कि 6 माह पूर्व उसकी मां भीखीदेवी को बुखार आया तो वे श्रीराम अस्पताल ले गए। जहां टीकमाराम ने बुखार का इंजेक्शन लगाया, लेकिन थोड़ी देर बाद उसकी मां के शरीर पर छोटे-छोटे दाने पड़ गए और शरीर जलने लगा। तबीयत ज्यादा बिगडऩे पर अपनी गलती छुपाने के लिए टीकमाराम के सहकर्मी मोहनलाल ने बेहोशी का इंजेक्शन देकर कहा कि घर जाओ, दो-तीन घंटे में ठीक हो जाएगा। करीब तीन घंटे तक होश नहीं आने पर उन्होंने टीकमाराम व मोहनलाल को कॉल कर कहा कि अभी तक होश नहीं आया है। इस पर मोहनलाल ने उनके घर आकर वापस अस्पताल चलने के लिए कहा। वे हॉस्पिटल पहुंचे तो टीकमाराम ने जांच कर सांचौर भेज दिया। सांचौर पहुंचने पर उनकी मां की मौत हो गई। पीडि़त ने आरोप लगाया कि उसकी मां की मृत्यु टीकमाराम की ओर से इंजेक्शन लगाने, दवाई देने तथा मोहनलाल की ओर से बेहोशी का इंजेक्शन लगाने से हुई।

करवा रहे जांच
अस्पताल में दवाई पिलाने से बच्चे की मौत के बाद दो-तीन मामले और सामने आए हैं। इनकी जांच करवा रहे हैं।

जयकिशन सोनी, थानाधिकारी, गुड़ामालानी

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