बाड़मेर. थार के रेगिस्तान में खेती में एक के बाद एक नवाचार होते जा रहे हैं। नवाचार प्रेमी किसान इस बार औषधीय पौधे सहजन से कमाई की कवायद कर रहे हैं। गुड़ामालानी के आडेल गांव में पूर्व प्रधान सोहनलाल भांभू ने अपने खेत में सहजन के करीब बारह हजार पौधे लगाए हैं। वहीं सेड़वा क्षेत्र के सीमावर्ती गांव जानपालिया में किसान जब्बारखान ने अपने खेत में 700 पौधों के साथ सहजन को अपना साथी बनाया है। जिले भर में एक दर्जन से अधिक किसानों ने सहजन से आय प्राप्त करने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया है।
सहजन के लिए अनुकूल परिस्थितियां
औषधीय पौधे सहजन के लिए बाड़मेर जिले की परिस्थितियां अनुकूल है। यहां की बलुई दोमट मिट्टी व तापमान सहजन के लिए उपयुक्त है। सहजन के पौधे के लिए अधिक पानी की जरूरत नहीं होती। पौधे को विकसित करने के लिए दवाओं का खर्च भी नहीं होता। एक तरह से कम खर्च में बूंद-बूंद सिंचाई के जरिए सहजन को आसानी से पनपाया जा सकता है। नवाचार करने वाले किसानों ने बूंद-बूंद सिंचाई योजना में 70 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ लेकर सहजन की खेती शुरू की है।
ऐसे लगा सकते हैं सहजन
सहजन का पौधा बाजार में 15 रुपए से लेकर 50 रुपए कीमत तक मिलता है। किसान इस पौधे को खरीदकर दो पौधों के बीच आठ से दस फीट की दूरी रखकर अपने खेत में लगा सकते हैं। खेत में अधिक संख्या में पौधे लगाने हो तो सहजन का बीज खरीदकर स्वयं की नर्सरी में पौधे तैयार कर खेत में लगाए जा सकते हैं। इससे लागत कम हो जाएगी।
250 रुपए किलो फलियां
सहजन का पौधा छह महीने बाद फलियां देना शुरू करता है। तीन वर्ष बाद भरपूर फलियां देता है। पौधे की उम्र करीब 25 वर्ष है। फलियां बाजार में 150 रुपए से 250 रुपए किलो की कीमत पर बिकती है। एक पौधा सीजन में पंद्रह से बीस किलो फलियां देता है। अनुमानत: एक हैक्टेयर से वर्ष भर में तीन से पांच लाख रुपए की कमाई हो सकती है। सहजन की पत्तियों व तने से भी कमाई की जा सकती है क्योंकि इनका औषधीय उपयोग है।
बाजार उपलब्ध नहीं
कृषि विशेषज्ञ डॉ. पदमसिंह भाटी बताते हैं कि सहजन की खेती बहुपयोगी है और यहां के वातावरण के हिसाब से पूरी तरह से उपयुक्त है। लेकिन उत्पादों के लिए स्थानीय स्तर पर कोई बाजार नहीं है। यह बड़ी समस्या है। भाटी सलाह देते हैं कि किसान सहजन की खेती करने से पहले बाजार की तलाश अवश्य करें। कृषि विज्ञान केन्द्र गुड़ामालानी से जुड़े डॉ. रावताराम बताते हैं कि गुजरात में सहजन की फलियों व अन्य उत्पादों का भरपूर मार्केट उपलब्ध है।
सोच समझकर लगाया सहजन
मेरे खेत में सहजन के 700 पौधे लगाए हैं। सभी पौधे खुद की नर्सरी में तैयार किए। बकरी पालन भी कर रहा हूं। सहजन की पत्तियां बकरियों को खिला रहा हूं। पत्तियां सूखाकर चूर्ण बनाता हूं। फलियां गुजरात ले जाकर बेचूंगा। काफी सोच समझकर अपने खेत में सहजन का बगीचा लगाया है, जो अभी फल-फूल रहा है।
-जब्बारखान, उन्नत कृषक गांव जानपालिया