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चौहटन/बाड़मेर. सीमावर्ती मिठड़ाऊ गांव ने प्रदेश में शराबबंदी की मुहिम को एक नई राह दिखाई है। यहां के तीन युवकों की शराब की वजह से जान जाने के बाद ग्रामीणों ने इतना बड़ा सबक लिया कि उन्होंने गांव में शराब पीने पर पूरी पाबंदी लगा दी। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को खुला कह दिया कि गांव में जब हम शराब पीएंगे ही नहीं तो यहां शराब की दुकान क्यों? नतीजा गांव से शराब की दुकान हटा दी गई है। यह सब एक 75 साल के बुजुर्ग की जिद से हुआ है, जिसने गांव के तीन युवकों की मौत के बाद कहा कि शराब नहीं छोड़ी तो मैं गांव छोड़ दूंगा।
उल्लेखनीय है कि गत 9 जुलाई को सीमावर्ती मिठड़ाऊ गांव के तीन युवकों की एक सड़क दुर्घटना में जान चली गई र्थी। एक साथ तीन युवाओं की अर्थी उठने पूरे गांव को सोचने पर मजबूर होना पड़ा। सात दिन बाद गांव के लोग एकत्रित हुए तो यहां तय हुआ कि शराब के कारण गांव खराब हो रहा है। 75 वर्षीय बुजुर्ग अमोलखराम ख्ंाभू ने कहा कि मैं एेसे गांव को उजड़ते हुए नहीं देख सकता। शराब बंदी का निर्णय नहीं होता है तो मैं गांव छोड़ जाऊंगा..। बूढ़ी आंखों में छलकते आंसू के साथ निकले ये शब्द मानो पूरे गांव के लिए बड़ा निर्णय बन गए और सारे लोगों ने एक साथ कहा कि अब गांव में कोई शराब नहीं पीएगा। ग्रामीणों ने संकल्प के बाद इसकी जानकारी अधिकारियों को दी।
कलक्टर को दे दी अर्जी
गांव के मौजीज लोग जिला कलक्टर के पास पहुंचे। उन्होंने बताया कि गांव में युवा शराब के आदी हो रहे है और इससे बड़ा नुकसान है। लिहाजा गांव में शराब की दुकान बंद कर दी जाए। यह हमारा फैसला है कि अब गांव मंे कोई शराब नहीं पिएगा। जिला कलक्टर ने आश्वस्त किया कि गांव से शराब की दुकान हटेगी।
सभी को करेंगे नशामुक्त
यह बड़ा निर्णय हुआ है। गांव में शराब बंदी से अन्य गांवों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। नशा समाज के लिए घातक है और युवाओं को इसके परहेज के लिए आगे आना चाहिए। - तरूणराय कागा, विधायक चौहटन
पत्रिका ने दिया प्रोत्साहन
शराब छोडऩे पर पत्रिका ने शाबास मिठड़ाऊ शीर्षक से प्रकाशित टिप्पणी में गांव के इस निर्णय की सराहना करते हुए प्रोत्साहित किया कि इस संकल्प पर अडिग रहे। इससे अन्य गांवों को भी सकारात्मक संदेश पहुंचेगा।
Published on:
03 Aug 2018 11:58 am
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