
ऩंदी गोशाला बनी, फिर भी नहीं मिटी बाड़मेर में बेआसरा पशुओं की समस्या
बाड़मेर. बाड़मेर शहर में बेआसरा पशुओं की समस्या है कि पूरी हल ही नहीं हो रही। पहले कभी गुजरात भेजने का प्रयास हुआ तो कभी कांजी हाउस भेजा। बावजूद इसके समस्या नहीं मिटी तो नंदी गोशाला में भी इनको भेजा गया। बावजूद इसके अभी भी शहर बेसहारा पशुओं से मुक्त नहीं हो पाया है। नगरपरिषद के प्रयास एेसा लगता है मानो नाकाफी साबित हो रहे हैं।
स्थिति यह है कि अभी भी कलक्टर परिसर से लेकर गलियों व चौराहों से हाईवे हर जगह बेसहारा पशु मंडराते नजर आते हैं। थारनगरी की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बेआसरा पशुओं का जमावड़ा है। यह समस्या सालों से चल रही है।
बेसहारा पशुआें के चलते कई जने मौत के मुंह में समा गए तो कई चोटिल हुए। इसके चलते सालों से लोग शहर को बेसहारा पशुआें से मुक्त करने की मांग करते रहे हैं। यह बात नहीं है कि इसको लेकर प्रयास नहीं हुए। कुछ साल पहले तक शहर से बेआसरा पशुओं को पकड़ कर कांजी हाउस भेजा जाता था। इसके बाद एक बार पशुओं को पकड़ कर गुजरात भेजा गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
नंदी गोशाला बनी, लेकिन समस्या का नहीं पूरा हल- इसके बाद नंदी गोशाला स्वीकृत हुई। जहां वर्तमान में पशुधन को भेजा जा रहा है। लॉकडाउन के दौरान अभियान चला तो काफी बेआसरा पशुओं को नंदी गोशाला भेजा लेकिन समस्या का पूरी तरह से हल अभी भी नहीं हुआ है।
हर जगह मंडरा रहे बेसहारा पशु- शहर में अब बेसहारा पशुओं की तादाद बढ़ती नजर आ रही है। शहर के मुख्य बाजार, स्टेशन रोड पर पशु मंडराते नजर आते हैं तो तंग गलियों में भी अब इनकी तादाद बढ़ रही है। जिला कलक्टर परिसर में भी बेआसरा पशु लोगों को परेशान कर रहे हैं तो हाईवे भी वे अपना कब्जा जमाए हुए हैं।
हादसों का डर, पूर्व में हो चुकी अनहोनी- शहर में बेआसरा पशुओं की बढ़ती तादाद के चलते शहरवासियों को अनहोनी का डर सता रहा है। गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों में बेसहारा पशुओं के चलते कई जने चोटिल हो चुके हैं तो कई जनों को जान भी गंवानी पड़ी।
Published on:
28 Oct 2020 06:50 pm
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