
Atrocities in Pakistan, Dalits are coming to take shelter in India
पाकिस्तान में अत्याचार, भारत में शरण लेने आ रहे हैं दलित
आर्थिक तंगी भी मुसीबत: पड़ोसी देश से थार एक्सप्रेस से हर फेरे में दो-चार परिवार पहुंच रहे भारत
रतन दवे
बाड़मेर पत्रिका.
दलितों के परिवारों के लिए अब पाकिस्तान में बढ़ता अत्याचार और रोजगार की तंगी परेशान करने लगी है। अपना सबकुछ बेचकर वे भारत की आने लगे है। थार एक्सपे्रस से हर फेरे में दो-चार परिवार पहुंच रहे है जो जोधपुर में आकर अपनों के साथ अस्थाई वीजा पर रहने लगे है। भील और मेघवाल जाति के इन परिवारों के रिश्तेदार 1965 और 1971 में यहां आ चुके है।
पाकिस्तान के छाछरो, मिठी, थरपारकर, सांगड़, छोर सहित अन्य इलाकों में बसे दलित परिवार लगातार ज्यादती के शिकार है। रोजगार का संकट होने के साथ ही वहां बहुसंख्यक इनकी बहू-बेटियों पर जुल्म करने लगे है। परिवार के युवाओं को रोजगार को तरसना पड़ रहा है। एेसे में ये अब पलायन करने लगे है।
थार एक्सप्रेस जरिया
2006 में प्रारंभ हुई थार एक्सप्रेस से अब तक सैकड़ों परिवार आ चुक है। इसमें चारण, राजपूत, मेघवाल, भील और माली परिवार ज्यादा है। इन परिवारों को बाड़मेर-जैसलमेर का वीजा नहीं मिल रहा है,जबकि इनकी रिश्तेदारी बाड़मेर-जैसलमेर में है। ये परिवार जोधपुर में किराएदार बनकर रह रहे है।
ताजा घटनाएं
86 दलित परिवारों को इस्लाम कबूल करवाया
पाकिस्तान के भदीन में शुक्रवार को 86 दलित परिवारों को इस्लाम कबूल करवाया गया। पीर हाफिज गुलाम मोहम्मद ने एक महफिल में एेसा करवाया। ये सभी गरीब परिवार है जिनके सामने रोजी-रोटी का संकट था और उनके लिए जान बचाने के लिए एक ही रास्ता बचा है।
30 लड़कियों का हुआ है अपहरण
सिंध इलाके में पिछले तीन महीने में दलित व हिन्दू परिवारों की 30 लड़कियों का अपहरण किया गया है। इनको इस्लाम ग्रहण करवाकर निकाह करवाने की जोर जबरदस्ती हुई है।
डॉक्टर की दुकानें जला दी, बेरहमी से पीटा
सिंध में ही डा. रमेश सिंधी की सात दुकानों में आग लगा दी गई। डा.रमेश को बेरहमी से पीटा गया है। मामूली कहासुनी बाद रमेश के साथ यह ज्यादती सरेआम हुई है।
अत्याचार एक परिवार की जुबानी
शिक्षक नारायण कागा पाकिस्तान छोड़कर भारत आ बसे है। नारायण से पाकिस्तान छोडऩे की बात पूछी तो आंखों में गुस्सा और पानी उतर आया। नारायण बताते है कि वहां पर अत्याचार इस तरह है कि शब्दों में नहीं कह सकते। मेरा छोटा भाई कृपाल द्वितीय श्रेणी शिक्षक था। उसको इतना परेशान किया जाने लगा कि हद पार हो गई। एक दिन सुबह उठे तो कृपाल, उसकी पत्नी, चार संतान और मेरी मां सबकी लाशें पड़ी थी। पाकिस्तान में कह दिया कि खुद ने शूट किया, एेसा होता है क्या? बस उसी दिन तय कर लिया कि यहां नहीं रहना। अपने परिवार को लेकर यहां आ गया हूं। वहां जो रह रहे है वो बहुत सह रहे है।
मदद करे सरकार
पाकिस्तान से वे परिवार है आ रहे है जिनके अपने पहले आ चुके है। ये हिन्दू परिवार है। इन परिवारों को यहां आने के बाद रोजगार का प्रबंध होना चाहिए। इनके लिए सामान्य सुविधाओं का इंतजाम करने में भी सरकार मदद करे। -बाबूङ्क्षसह चारण, अध्यक्ष ढाटपारकर वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन
Published on:
19 Jun 2019 09:52 am

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