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नई शिक्षा नीति में प्रतिभाओं को आगे आने के अवसर ज्यादा

-महिला पीजी कॉलेज में नई शिक्षा नीति पर संगोष्ठीनई शिक्षा नीति करेगी बुनियाद को मजबूत

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नई शिक्षा नीति में प्रतिभाओं को आगे आने के अवसर ज्यादा

नई शिक्षा नीति में प्रतिभाओं को आगे आने के अवसर ज्यादा

बाड़मेर. राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य एक मुकम्मल और और अच्छा इंसान बनाना है। दरअसल वक्त की जरूरत के मुताबिक़ नीति रीति में अनुकूल परिवर्तन ज़रूरी हो जाते हैं। उम्मीद है यह शिक्षा नीति स्थानीय और मातृ भाषा में शिक्षा को बढ़ावा देकर प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर प्रदान करेगी।
राजकीय महिला पीजी महाविद्यालय में नीति आयोग भारत सरकार, भारतीय शिक्षण मंडल और युवा विकास केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि जिला परिषद सीईओ मोहनदान रतनू ने स्नातकोत्तर शिक्षा नीति में शिक्षकों की भूमिका विषय पर आयोजित संगोष्ठी में कहा नई शिक्षा नीति बचपन को बचाने और मूल प्रतिभाओं को विकसित करने पर जोर देती है।
नई शिक्षा नीति करेगी बुनियाद को मजबूत
विशेष वक्ता अखिल भारतीय शिक्षण मंडल के कार्यालय प्रमुख गजराज डबास ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विस्तृत ब्योरा देते हुए कहा कि इसमें पहले पांच वर्षों में खेलकूद और दूसरे तीन वर्षों में बुनियाद मज़बूत करने पर जोर रहेगा। अगले तीन साल में विद्यार्थी की दक्षता विकसित करना और नवीं से बारहवीं तक के चौथे चरण में मजबूती प्रदान करने पर जोर रहेगा। अब आट्र्स के विद्यार्थी साइंस और विज्ञान के कला के विषयों को एक साथ पढऩे का विकल्प चुन सकेंगें।
नए प्रावधान फायदेमंद
कॉलेज प्राचार्य डॉ. हुक्माराम सुथार ने कहा उच्च शिक्षा में ख़ास तौर पर छात्राओं के लिए इस नीति में नई राहत के प्रावधान हैं। जिससे यदि कोई एक वर्ष पढता है तो सटिफिकेट, दो वर्ष तो डिप्लोमा और तीन वर्ष तो डिग्री और चार साल पर ग्रेजुएशन मना जाएगा।
युवा विकास केंद्र समन्वयक मुकेश पचौरी, सहायक आचार्य गणपतसिंह राजपुरोहित ने भी नीति की विशेषताओं पर विचार व्यक्त किए। निजी शिक्षण संस्थान अध्यक्ष बाल सिंह राठौड़ ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
दूसरे सत्र में समूह प्रस्तुतिकरण में लक्ष्मी बख्तानी, मुस्कान जैन, जयश्री छंगाणी, गवरी और रघुवीर सिंह तामलोर ने अपने समूह के साथ की गई चर्चा को लेकर शिक्षा नीति पर विचार व्यक्त किए। कार्यकम में प्रदीप राठी, रतन पटेल, दशरथ सोनी, डॉ.जसवंत मायला, मंजू जैन, आशा बाघेला, मिश्रीदान चारण, चेतनराम फड़ोदा, श्रीराम विश्नोई, इंदु चौधरी, लाखदान चारण, प्रो. एमआर गढ़वीर प्रफुल्ल कुमार टाक , गणेश कुमार, मांगीलाल जैन, दयालाल सांखला, गायत्री तंवर सरिता लीलड़ सहित कई शिक्षाविद शामिल हुए।

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