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12 लाख लख्त-ए-जिगर, डॉक्टर केवल 10

-बाड़मेर में 7 और बालोतरा में 3 बच्चों के डॉक्टर-दोनों बड़े सरकारी अस्पतालों में बच्चों के लिए नहीं आइसीयू-तैयारी में अभी एमसीएचयू में कोविड और आइसोलेशन वार्ड

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12 लाख लख्त-ए-जिगर, डॉक्टर केवल 10

12 लाख लख्त-ए-जिगर, डॉक्टर केवल 10

बाड़मेर. कोरोना की तीसरी लहर बच्चों पर नजर गड़ाए हुए है। सुनकर ही कलेजा कांप गया है। तैयारियां अभी से नहीं हुई तो सच मानिए दूसरी लहर से भी ज्यादा घिरे हुए होंगे। बात जिगर के टुकड़ों की है, प्रशासन-शासन अभी से सचेत हो जाए और व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर लें, वरना बाद में हाथ पांव फुलाकर यह कहना कि ऑक्सीजन नहीं है, इंजेक्शन नहीं है, भामाशाह तलाशों और इधर से उधर दौडऩा सब मुश्किल होगा। अभी तो आलम यह है कि बच्चों के इलाज के लिए जिले में महज 10 विशेषज्ञ चिकित्सक है और बच्चे करीब 12 लाख।

जिले में अनुमानित 12 लाख बच्चे हैं, जो 0-18 साल के बीच में है। इनका स्वास्थ्य जिले के दो सरकारी अस्पतालों में देखा जाए तो केवल 10 चिकित्सकों के कंधों पर है। महामारी का दौर अगर आता है तो नाममात्र के चिकित्सकों के भरोसे पर बच्चों का उपचार कैसे संभव होगा, यह बड़ी चिंता का कारण है।
जिला अस्पताल में केवल 7 चिकित्सक
एमसीएचयू में बच्चों के उपचार के लिए केवल 7 चिकित्सक है। हालांकि यह आंकड़ा सामान्य रूप से पर्याप्त बताया जा रहा है। केवल एक प्रोफेसर का पद रिक्त है। लेकिन बच्चों पर किसी तरह का संकट आता है तो नाममात्र के चिकित्सकों के भरोसे होगा। विशेषज्ञ यह भी बता रहे हैं कि बच्चों के बीमार होने पर चाइल्ड स्पेशलिस्ट के अलावा उसका उपचार करना पड़ा ही कठिन हो जाएगा। वहीं बालोतरा के सरकारी अस्पताल में 3 शिशुरोग विशेषज्ञ है।
वर्तमान में कुल 27 बेड बच्चों के लिए
जिला अस्पताल की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई (एमसीएचयू) में वर्तमान में बच्चों के लिए कुल 4 वार्ड है। इनमें कुल 27 बेड बच्चों के लिए लगाए गए हैं। जहां पर बच्चों को भर्ती कर उपचार किया जाता है। वहीं एसएनसीयू में 16 बेड है। यहां पर केवल नवजात को ही भर्ती किया जाता है।
एमसीएचयू में आईसीयू नहीं
एमसीएचयू में बच्चों के लिए कोई आइसीयू नहीं है। इसके लिए करीब 2 महीने पहले प्रपोजल तैयार किया गया था। जिसमें 10 बेड का पीआइसीयू बनना है। लेकिन यह कब बनेगा, अभी तक कोई तैयारी नहीं है। सूत्र बताते हैं कि इसे बनने में अभी समय लग सकता है। जबकि कोविड की तीसरी लहर की आशंका को लेकर विशेषज्ञ अभी से ही आशंकित है।
बच्चों के लिए 9 वेंटिलेटर, उपयोगिता पर सवाल
अस्पताल में बच्चों के लिए 9 वेंटिलेटर है लेकिन इनका संचालन कैसे किया जाएगा, इसको लेकर कुछ भी पता नहीं है। पूर्व में भी यहां पर बच्चों के वेंटिलेटर की जरूरत होने पर भी उपयोग नहीं करते हुए रैफर करने के मामले सामने आ चुके हैं। जब महामारी होगी तो क्या इनका पूरी तरह उपयोग हो पाएगा, यह भी एक बड़ा सवाल है।
अब तक की है यह है तैयारी
एमसीएचयू में कोविड की व्यवस्थाओं को लेकर अभी दो अलग-अलग वार्ड बनाए गए हैं। यहां पर एक आइसोलेशन वार्ड में 4 बेड लगाए गए हैं। वहीं कोविड वार्ड में 8 बेड लगे है। एक बच्चा सीटी स्कोर आने पर शुक्रवार को यहां पर भर्ती किया गया।
ऑक्सीजन पाइप लाइन से
अस्पताल में बेड पर ऑक्सीजन पाइप लाइन से पहुंच रही है। इसे सेंट्रल सिस्टम से जोड़ा गया है। हालांकि अभी जरूरत नहीं होने पर सिस्टम नहीं चलाया जा रहा था। इसके कारण बेड के पास ऑक्सीजन सिलेंडर रखे मिले।
विशेषज्ञ की सलाह...
बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। महामारी में मास्क तो जरूरी नहीं अनिवार्य है। घर पर भी मास्क पहनना चाहिए और परिवार में कोई व्यक्ति बीमार है या बुखार से ग्रसित है तो बच्चों को उनसे दूर ही रखें। साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जाए। बच्चों को हमेशा गर्म खाना खिलाएं। फास्टफूड से पूरी तरह दूरी बनाएं। घर से बाहर नहीं निकालें। खुद भी जब तक जरूरी नहीं हो बाहर नहीं जाए, क्योंकि परिवार के बड़े लोगों के बाहर जाकर आने के बाद संपर्क में आने पर मासूमों के संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। बार-बार हाथ धोने की आदत बच्चों में भीं डालें। सेनेटाइजर का प्रयोग करें। कुछ इसी तरह कीआदतों को जीवन का हिस्सा बनाकर हम खुद और बच्चों को भी कोविड-19 के खतरे से बचा सकते हैं। विशेष ध्यान रखने की बात यह भी है कि बच्चे के बीमार होने पर तुरंत उसे चिकित्सक को दिखाएं।
डॉ. अमित शांडिल्य, सहायक आचार्य, वरिष्ठ शिशुरोग विशेषज्ञ राजकीय जिला अस्पताल बाड़मेर

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