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एक शिक्षक का पर्यावरण और वन संरक्षण का जज्बा, 10 हजार पौधे कर चुके रोपित

विद्यालय, गांव, मंदिर, घर-घर पौधों का रोपणसाल 1999 में 50 पौधे लगाकर शुरूआत

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एक शिक्षक का पर्यावरण और वन संरक्षण का जज्बा, 10 हजार पौधे कर चुके रोपित

एक शिक्षक का पर्यावरण और वन संरक्षण का जज्बा, 10 हजार पौधे कर चुके रोपित

बाड़मेर. अपने विद्यार्थी जीवन में ही पर्यावरण संरक्षण की रूचि ऐसी जगी कि आज करीब 10 हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं। कहते हैं कि शिक्षक समाज का आईना होता हैं, लेकिन यहां हम जिस शिक्षक का जिक्र कर रहे हैं वे इससे कुछ ज्यादा है और धरा को हरा-भरा करते हुए विश्व वानिकी संरक्षण में भी अपना योगदान कर रहे हैं।
पर्यावरण प्रेमी और शिक्षक भैराराम आर भाखर पिछले 21 साल से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अग्रणी हैं। उन्होंने विद्यालय, गांव, मंदिर, घर-घर विभिन्न प्रजाति के छायादार, फूलदार और औषधीय प्रकृति के 10 हजार पौधों का रोपण किया है।
पर्यावरण प्रेमी की कहानी उनकी जुबानी...
पर्यावरण के संरक्षक भैराराम बताते हैं कि साल 1999 में 50 पौधे लगाकर शुरूआत की गई। पौधे लगाओ, जीवन बचाओ अभियान के तहत प्रतिवर्ष अपनी आय से पौधशाला से पौधे खरीद कर संस्थागत वानिकी एवं घर-घर पौधे लगाने का कार्य किया। बीते साल डंूगर कॉलेज बीकानेर के प्रोफेसर श्याम सुंदर ज्यांणी की प्रेरणा से औषधीय पौधे सहजन के 2 हजार बीजों का रोपण करवाया गया। पौधों की देखरेख करने के लिए पेड़ मित्र बनाकर संरक्षण एव संवर्धन का दायित्व सौंपने का कार्य भी किया जा रहा है। मेहमान बनकर कहीं जाना है तो भी पौधे साथ ले जाते है और रोपण करवाकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित और जागरूक करते हैं।
पर्यावरण और सघन वन के पीछे यह है प्रेरणा
शिक्षक भाखर का कहना है कि झुंझ्ंाुनू के गणितज्ञ घासीराम वर्मा और बाड़मेर के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी मूलाराम बैरड़ उनके प्रेरणा स्रोत हैं। पर्यावरण संरक्षण का कार्य दोनों की प्रेरणा से ही संभव हो रहा है।

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