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इलाज ही नहीं खून देकर मरीज की जान बचाते है बाड़मेर के नर्सिंगकर्मी,जानिए पूरी खबर

बाड़मेर में करीब 1500 नर्सिंगकर्मी कार्यरत है, इसमें 60 प्रतिशत रक्तदाता है। मरीज की जान आने पर उपचार के साथ अपना खून देने की यह बेमिसाल परंपरा है।

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Barmer's nursing worker, saves patients life, giving blood

Barmer's nursing worker saves patients life by giving blood

बाड़मेर. आशा...बाड़मेर की एक नर्सिंगकर्मी। स्त्रीरोग के वार्ड में कार्यरत है। अकसर यहां प्रसूति के वक्त महिलाओं केा रक्त की जरुरत रहती है। परिजन इधर-उधर भागते है और इलाज करती आशा बार-बार पूछती है कि खून का क्या हुआ? कहीं से इंतजाम नहीं होता देखती है और उसका ग्रुप मिल रहा है तो रक्तदान कर देती है। छोटे भाई का ग्रुप मिले तो तत्काल उसको बुला लेती है। अपनी बहिनों को भी प्रेरित किया हुआ है और मिलने वाले भी। एेसा ही कुछ मिजाज है कमलेश का। ये दो ही नहीं बाड़मेर में करीब 1500 नर्सिंगकर्मी कार्यरत है आर इसमें 60 प्रतिशत रक्तदाता है। मरीज की जान आने पर उपचार के साथ अपना खून देने की यह बेमिसाल परंपरा यहां कायम किए हुए है।
दरअसल बाड़मेर जिले में रक्तदान केा लेकर पूर्व के वर्षों में हिचक रही। ब्लडबैंक भी नहीं था। एेसे में यहां के नर्सिंगकर्मी मरीज की जान के लिए खुद लड़ते रहे। इन लोगों ने परंपरा शुरू कर दी कि जरुरत होने पर वे भी रक्तदान करेंगे। यह स्थिति करीब तीन दशक से जारी है। अब तो यह स्थिति है कि यहां के कई नर्सिंगकर्मियों ने तो तय कर लिया है कि हर तीसरे महिने रक्तदान करेंगे।

ग्रुप से जुड़े हैै- यहां ब्लर्ड डोनर्स का एक ग्रुप बना है इसमें दो हजार से अधिक लोग जुड़े है। इसमें सर्वाधिक नर्सिंगकर्मी है। मरीज को जरुरत पड़ते ही व्हाट्सएप के जरिए ये संदेश देते है और फिर तत्काल खून का प्रबंध हो जाता है। इसमें महिला-पुरुष सब शामिल है।
मरीजों से अलग जुड़ाव

मरीज के साथ इन नर्सिंगकर्मियों का अलग जुड़ाव हो जाता है। उपचार के साथ खून देने पर परिजन भी उनके प्रति श्रद्धा में रहते है। नर्सिंगकर्मी ही नहीं यहां चिकित्सक भी इनसे प्रेरित होकर रक्तदान करते है।
मरीज की जान महत्वपूर्ण

हम नर्सिंगकर्मी मरीज की जान के लिए लड़ते है। इसमें जब रक्त की जरुरत हों और ग्रुप मिल रहा है तो रक्तदान में कहां हर्ज है। यह नेक कार्य है और नर्सिंग तो मानवता से जुड़ा हुआ कार्य ही है।- आशा ,नर्सिंगकर्मी
रक्तदान में अस्पताल का पूरा स्टाफ सकारात्मक हैै और नर्सिंगकर्मी तो आगे रहते है। यहां ब्लडबैंक है,इसके बावजूद यह चिंता नहीं रहती है कि रक्त की कमी से किसी की जान पर बन आएगी।- डा. बी एल मंसूरिया, प्रमुख चिकित्साा अधिकारी राजकीय अस्पताल

- 1500 के करीब है नर्सिंगकर्मी जिले मेंं

- 60 प्रतिशत करते है रक्तदान

- 15 से 20 बार रक्तदान करने वाले 25 से ज्यादा