3 नवंबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

30 डॉक्टरों को बाड़मेर भेजा, आए महज 13

कैसे सुधरेगी चिकित्सा व्यवस्था... - स्वास्थ्य विभाग ने बाड़मेर जिले में 30 चिकित्सकों की नियुक्ति के किए आदेश, लेकिन 13 ने ही ग्रहण किया पदभार- हजारों ग्रामीणों को सामान्य उपचार तक नहीं हो रहा नसीब, शहर, कस्बों तक लगानी पड़ती है दौड़
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रायपुर

•

image

bhawani singh

•

Updated: 20 Jul 2016, 1:05 PM IST

barmer

barmer

पहले लिग्नाइट और बाद में तेल खोज से बाड़मेर जिला विकास को छू रहा है, लेकिन पिछड़ेपन का कलंक अभी भी नहीं मिटा है। इसे यूं भी समझ सकते हैं कि हाल ही में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 30 चिकित्सकों की नियुक्ति के आदेश किए, लेकिन 13 ने ही पदभार ग्रहण किया। ऐसे में ग्रामीणों को उपचार के लिए पहले की तरह ही भटकना पड़ रहा है।

जिले के चिकित्सालयों में दशकों से चिकित्सकों की कमी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। परेशान ग्रामीणों की मांग व जनप्रतिनिधियों के प्रयास के बाद सरकार जिले में चिकित्सकों की नियुक्ति के आदेश करती है, लेकिन प्रदेश के अन्य जिलों से बाड़मेर की अधिक दूरी, आवागमन के सीमित साधन व इसके भौगोलिक दृष्टि से पिछड़े होने के चलते चिकित्सक यहां सेवाएं देने में रुचि नहीं दिखा रहे।

यहां चिकित्सकों ने किया ज्वॉइन

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने 24 जून को आदेश जारी कर 30 चिकित्सकों की नियुक्ति बाड़मेर जिले में की, लेकिन बेरीवाला तला, रतेऊ, चौहटन, बाटाडू, नगर, बाखासर, सारला, बावड़ी कला, भंवार, रमणिया, केलनोर, राणीगांव, बुरहान का तला में 13 चिकित्सकों ने ही पदभार ग्रहण किया।

यहां नहीं आए चिकित्सक

जानकारी अनुसार सामुदायिक चिकित्सालय धोरीमन्ना, समदड़ी, बायतु, रामसर, कल्याणपुर तहसील व उपखंड मुख्यालय होने के कारण शहरी क्षेत्र में आते हैं। यहां दो वर्ष सेवाएं देने के बावजूद चिकित्सकों को पीजी चयन प्रक्रिया में कोई फायदा नहीं मिलता। ऐसे में इन चिकित्सालयों में नियुक्त 6 चिकित्सकों ने पदभार ग्रहण नहीं किया। वहीं सामुदायिक अस्पताल देताणी, निम्बलकोट, बिशाला, कवास, नोखड़ा ग्रामीण क्षेत्र हैं, लेकिन इनकी जिला मुख्यालय से दूरी, पिछड़ापन, सुविधाओं का अभाव चिकित्सकों को रास नहीं आ रहा। ऐसे में यहां नियुक्ति किए गए चिकित्सक आदेशों को निरस्त करवाने में जुटे हुए है।

यहां पदरिक्तता की मार

जिले में एक जिला अस्पताल, एक उप जिला अस्पताल एवं 22 सामुदायिक व 93 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। सीएचसी में 5 व पीएचसी में चिकित्सक का 1 पद स्वीकृत है, लेकिन रतासर, भिण्डे का पार, तारातरा, रामदेव मंदिर, मिठड़ाऊ, सरनू, मजल पीएचसी में चिकित्सकों के पद रिक्त होने से कंपाउंडर और नर्स के भरोसे अस्पताल चल रहे हैं। इसके अलावा अधिकांश सामुदायिक चिकित्सालयों में चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। ऐसे में सामान्य बीमारियों के उपचार के लिए ग्रामीणों को नजदीक के शहर, कस्बे तक दौड़ लगानी पड़ती है।

फैक्ट फाइल

01 जिला तथा उप 01 उप जिला अस्पताल है बाड़मेर में

22 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं जिले में

93 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हो रहे संचालित

122 पद स्वीकृत हैं सीएचसी-पीएचसी में

53 पद अभी भी रिक्त हैं इनमें से

13 जने ही आए

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी संख्या में चिकित्सकों की नियुक्ति जिले में की थी, लेकिन अभी तक 13 जनों ने पदभार ग्रहण किया है। अन्य जिलों के चिकित्सक बाड़मेर में सेवाएं देने को कम इच्छुक होते हैं। इसके बावजूद प्रयास जारी हैं।

डॉ. सुनीलकुमार सिंह बिष्ट, सीएमएचओ, बाड़मेर