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बाड़मेर की रैंक 113वीं, सफाई और स्वच्छता में अब भी दाग

स्वच्छता सर्वेक्षण-2020: पिछली बार से जरूर हुआ है सुधार-घर-घर कचरा संगहण योजना का मिला फायदा-लोगों में भी सफाई को लेकर दिखी जागरूकता-वेस्ट जोन के 140 शहरों में से बाड़मेर आया 113वें नंबर पर
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बाड़मेर

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Mahendra Trivedi

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Updated: 21 Aug 2020, 8:30 PM IST

बाड़मेर की रैंक 113वीं, सफाई और स्वच्छता में अब भी दाग

बाड़मेर की रैंक 113वीं, सफाई और स्वच्छता में अब भी दाग

बाड़मेर. स्वच्छता सर्वेक्षण-2020 में बाड़मेर शहर की रैंक काफी नीचे रही है। जोनल रैकिंग में बाड़मेर की रैंक 113वीं आई है। वहीं कुल स्कोर 2256 रहा है। वेस्ट जोन में 5 राज्यों के 140 शहरों की रैंक जारी की गई है।
स्वच्छता सर्वेक्षण में जोन के अनुसार रैंक जारी की गई है। वेस्ट जोन में राजस्थान के 28 शहरों को रैंक में स्थान मिला है। इसमें ऑलओवर बाड़मेर की रैंक 113वीं आई है। जिसमें देखा जाए तो कुछ सुधार हुआ है। लेकिन धरातल पर अभी और प्रयास करने की जरूरत है। जिससे स्वच्छता सर्वेक्षण में बाड़मेर की स्थिति और सुधर सके।
पिछली बार 500 में भी नहीं था स्थान
बाड़मेर शहर का साल 2019 के स्वच्छ सर्वेक्षण में 500 शहरों में भी स्थान नहीं था। ऐसे में इस बार स्थिति अच्छी कही जा सकती है। जबकि इससे पहले 2018 में यह रैंक 414 नंबर पर थी। दोनों बार से इस बार बेहतर कही जा सकती है।
रैंक में सुधार के ये रहे कारण
-घर-घर वाहनों से कचरा संग्रहण
-कचरा फैलाने की प्रवृत्ति पर रोक
-बाजार में कचरा फैंकने वालों पर जुर्माना
-दुकानों ने प्रतिष्ठानों के बाहर रखे डस्टबिन
-गली-मोहल्लों में रखवाए कचरा पात्र
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ये है कमियां, सुधार की जरूरत
-शहर में अभी भी कई जगह डंपिंग स्टेशन बनाए हुए हैं। जहां पर कचरा कई-कई दिनों तक नहीं उठाया जाता है। इससे जहां आवागमन बाधित होता है। वहीं क्षेत्र के लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। इससे स्वच्छता सर्वेक्षण में भी फीडबैक पर भी असर पड़ता है।
-बाड़मेर शहर का कचरे के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। यह सबसे बड़ी कमी उभर कर सामने आती है। लंबे समय से चल रही निस्तारण की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। गेहूं गांव के लोग आज तक शहर के कचरे की समस्या से त्रस्त है।
-सीवरेज सिस्टम सुचारू नहीं चल रहा है। पूरा शहर सीवरेज की समस्या से परेशान है। गंदा पानी सड़कों पर फैलता है। वहीं कई स्थानों पर गंदे पानी का जमाव भी हो रहा है। इससे आमजन के साथ प्रशासनिक अधिकारी तक परेशान होते हैं।
-शहर की मुख्य सड़कों को सुबह चमका दिया जाता है। लेकिन शहर की गलियां कई दिनों तक सड़ती रहती है। यहां सफाई करने वाले नियमित रूप से नहीं पहुंचते हैं। रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था कारगर रही थी। लेकिन अब बंद है।